विनीता शर्मा ‘विनी’ (प्रतिनिधि कवयित्रियाँ 2020)

विनीता शर्मा ‘विनी’ अपनी कविताओं के लिए कई पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं; विशेष रूप से: श्रीमति एम. सुगुणा स्मारक पुरस्कार-2011, साहित्य परिवार बैंगलोर से साहित्य भूषण पुरस्कार-2012 और महिला हिंदी साहित्य सेवा पुरस्कार-2015। उन्हें 2012 में आभा प्रफुल्ल मंच, नागपुर द्वारा भी सम्मानित किया गया था। उनकी कविताएँ अक्सर विभिन्न पत्रिकाओं, ई-ज़ीन, और अखबारों में छपते रहती हैं, और रेडियो और टीवी पर भी प्रसारित हुईं हैं। विनीता शर्मा नियमित रूप से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलनों में भाग लेती हैं। 'स्वान्त सुखाय' उनकी प्रकाशित कविता संग्रह है।
विनीता शर्मा ‘विनी’

पुलवामा के शहीदों पर

ख़ाक होकर भी तुम्हें हम याद आयेंगे
जब शहादत की कभी चर्चा चलेगी

राख के उस ढ़ेर में अबतक दबी चिंगारियाँ हैं
शांत सी बहती पवन के साथ रहती आँधियाँ हैं
हम शहीदों के बुझे दीपक जलायेंगे
जब बग़ावत की कभी चर्चा चलेगी।

बाँटते हैं प्यार लेकिन हम कभी बँटते नहीं हैं
मुश्किलें बढ़ती रहें पर हौंसले घटते नहीं हैं
हम नहीं करते कभी ईमान का सौदा बतायेंगे
जब तिजारत की कभी चर्चा चलेगी

दोस्ती या दुश्मनी हो आग से ठंडी बरफ से
हम नहीं करते किसी पर वार पीछे की तरफ से
बस तुम्हारे सामने तुमको उठायेंगे
जब हिमाक़त की कभी चर्चा चलेगी

हैं नहीं मुहताज मंदिर मस्जिदों गिरिजाघरों के
नित्य अर्पित प्रार्थना विश्वास अनबोले स्वरों के
हम तराशे पत्थरों में प्राण लायेंगे
जब इबादत की कभी चर्चा चलेगी

क्या ज़रूरी बात करने के लिए संवाद ही हो
आँख से आँसू निकलने की वजह अवसाद ही हो
जो कभी हम लिख न पाए तुम उसे पढ़कर सुनाना
जब इबारत की कभी चर्चा चलेगी

ख़ाक होकर भी तुम्हें हम याद आयेंगे
जब शहादत की कभी चर्चा चलेगी।



2 comments :

  1. its always feel good emotion to read poetry of this sort. We do remember the sacrifices. Wonderful verse.

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  2. हम तराशे पत्थरों में प्रयाण लायेंगे
    जब इबादत की कभी चर्चा चलेगी
    वाह,बहुत बढ़िया । शहीदों को समर्पित आपकी कविता स्तुत्य है । शहीदों को शत शत नमन ।जय हिन्द ।
    ज्ञानचंद मर्मज्ञ,बंगलौर ।

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