कठिन समय की तैयारी

अनुराग शर्मा
आप सभी को विक्रमी संवत 2077 युगादि की बधाई और मंगलकामनाएँ!

फ़रवरी मास के सम्पादकीय में कोरोना का संदर्भ आने से लेकर अब तक बहुत कुछ बदल चुका है। तब मुख्यतः चीन के हुबेई प्रांत के वुहान नगर तक सीमित रहा कोविड-19  का विषाणु सार्स-सीओवी-2 (SARS-CoV-2) एक मास के इस अंतराल में वुहान से बाहर आकर संसार भर को महामारी से त्रस्त कर चुका है। इस रोग से काल-कवलित होने वालों की संख्या के मामले में इटली और स्पेन ने इस रोग की जन्मस्थली चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। ईरान, फ़्रांस, और अमेरिका में भी इस महामारी से मरने वालों की संख्या बढ़ी है। प्रभावित देशों और मृतकों, दोनों के ही अभी और बढ़ने की आशंका है। आज संसार इस बुरी तरह से भयभीत है जैसा पहले शायद विश्वयुद्धों या प्लेग आदि के प्रसार के समय ही हुआ होगा। यह सम्पादकीय लिखते समय, अपने नागरिकों की सुरक्षा के उद्देश्य से अमेरिका और भारत दोनों ही लॉकडाउन से गुज़र रहे हैं। यथासम्भव लोग घरों से कार्यरत हैं। लेकिन न तो हर काम घर बैठे हो सकता है और न ही हर जगह आवश्यक संरचना उपस्थित है। ऐसे में महामारी के भय के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के चक्र के रुकने से अनेक लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है। अमेरिका में भी अनेक नौकरियाँ जाने की आशंका है परंतु भारत के महानगरीय निम्नमध्यवर्गीय असंगठित श्रमिक वर्ग के भारी जन-पलायन के चित्र विचलित करने वाले हैं। पुष्ट सूत्रों के अनुसार अनेक लोग यातायात व्यवस्था पर रोक के चलते सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित अपने पैतृक ग्रामों के लिये सपरिवार पैदल ही निकल पड़े हैं। जहाँ विदेशों से अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिये संसार भर में भारत की प्रशंसा हुई, वहीं देश के महानगरों के इन श्रमिक परिवारों के सुरक्षित निवास और पालन-पोषण की पर्याप्त व्यवस्था और समय पर उन तक उसकी जानकारी न पहुँच पाना अति दुर्भाग्यपूर्ण है। यह पलायन उन ग्रामों के लिये खतरनाक भी है जो अब तक कोविड-19 विषाणु से अछूते हैं। जागो प्रशासन जागो!

कोरोना-विपदा द्वारा बरपे कहर से डूब रहे यूरोप और अमेरिकी स्टॉक मार्केट में चीन द्वारा की जा रही भारी चीनी खरीदारी की अफ़वाहों के बीच जर्मनी के हेस प्रांत से वित्तमंत्री टॉमस शेफ़र की आत्महत्या का दुःखद समाचार सामने आया है। यह दुर्घटना कोरोना-संकट के स्वास्थ्य से इतर क्षेत्रों में पड़ रहे प्रभावों की ओर ध्यानाकर्षण करा रही है।

एल्कोहल द्वारा कोरोना से बचाव की खबर फैलने पर ईरान में स्पिरिट पीने से अनेक मौतें हुईं। अमेरिका में एक दम्पति ने हायड्रॉक्सीक्लोरोक्विन को लाभप्रद पाये जाने की बात सुनकर उसके भ्रम में घर में पहले से रखे हुये क्लोरोक्विन फ़ॉस्फ़ेट रसायन को पानी में घोलकर पी लिया जिससे पत्नी की तबियत बिगड़ गयी और पति की मृत्यु हो गयी। संचार क्रांति और सोशल-मीडिया भाग्योदय के बाद संसार के किसी भी क्षेत्र में, कोई भी समस्या हो, सलाहों और उपदेशों की बाढ़ आ जाती है। पहली बात तो यह कि हर जानकारी प्रामाणिक ही नहीं होती, दूसरे यह कि विषय-विशेषज्ञता के अभाव में कुछ का कुछ समझने की आशंका भी बढ़ जाती है। कुल मिलाकर चिकित्सा आदि से सम्बंधित सलाहों के मामले में हम सबको अति सचेत रहने की आवश्यकता है। अप्रामाणिक जानकारी को आगे फैलाकर आप कई निर्दोष जीवन खतरे में डाल सकते हैं, उससे बचें।

इस विषाणु खुद बचने और रोग के प्रसार को रोकने के लिये एकांत एक कारगर उपाय है जिससे एक व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण रोका जा सकता है। अकारण घर से बाहर न निकलिये, निकलना अनिवार्य हो तो भी पर्याप्त दूरी बनाये रखिये। दूसरा उपाय खाँसी, थूक आदि से बचने-बचाने का है, जिसका पालन तनिक संयम, जागरूकता और मास्क आदि के प्रयोग द्वारा भली-भाँति किया जा सकता है। तीसरा उपाय हाथ साबुन से धोना, और अस्वच्छ हाथों से अपना मुखमण्डल छूने से बचना है। रोग के लक्षणों या आशंका की स्थिति में सुनी-सुनाई बातों में आने के बजाय किसी स्वास्थ्य केंद्र या रुग्णालय जाकर चिकित्सक की सलाह लीजिये।

सुषम प्रभा बेदी
(26 जुलाई 1945 – 20 मार्च 2020)
प्रवासी हिंदी साहित्यकारों में एक प्रमुख नाम सुषम बेदी का है। इस माह उनकी मृत्यु के कारण प्रवासी हिंदी जगत साहित्य स्तब्ध है। नयी दिल्ली में जन्मी सुषम जी का जन्म का नाम सुषम प्रभा धमेजा था। दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज की प्रोफ़ेसर सुषम जी का अमेरिका प्रवास 1979 से आरम्भ हुआ जहाँ सन् 1985 में कोलम्बिया विश्वविद्यालय में आरम्भ हुये हिंदी शिक्षण करने के बाद उन्होंने मृत्युपर्यंत सिटी कॉलेज में अध्यापन किया। न्यू यॉर्क विश्वविद्यालय में हिंदी-उर्दू कार्यक्रम की स्थापना में उनका प्रबल योगदान रहा। भारत में आरम्भ हुई अभिनय यात्रा को उन्होंने विदेश में रेडियो व टीवी कार्यक्रमों के साथ जारी रखा। सन् 1978 से पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होने वाली सुषम जी के अब तक एक काव्य संग्रह, दो कथा संग्रह, तथा आठ उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। उनके परिवार में उनके पति राहुल बेदी के अतिरिक्त एक पुत्र व एक पुत्री हैं। सेतु पत्रिका की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

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आपका,


सेतु, पिट्सबर्ग ✍️

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