चार महाद्वीपों में बिखरी नदी सी अबाध जीवन धारा: कैराली मसाज पार्लर

मधु संधु

मधु संधु

‘कैराली मसाज पार्लर’ अर्चना पेन्यूली का 2020 में भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित चौथा उपन्यास है। 2014 में प्रकाशित कहानी ‘डेरिक की तीर्थ यात्रा’ और 2016 में प्रकाशित उपन्यास ‘पॉल की तीर्थयात्र।‘ के नायक डेरिक/ पॉल को हम ‘कैराली मसाज पार्लर’ में देखते हैं। इस ग्लोबल उपन्यास की नायिका को तीन बार तलाक लेना पड़ता है। चार शादियाँ करती है। एशिया, यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका चारों महाद्वीपों में समय-समय पर रहती है। हर महाद्वीप से, उसकी संस्कृति से सीखती है। प्रकृति से उसे विशेष जुड़ाव है। वह जलपरी है, कम्प्यूटर  विशेषज्ञ है, मसाज की बारीकियाँ जानती है। आर्थिक स्वावलंबन के लिए उसे मसाज पार्लर खोलना पड़ता है। अपने प्रथम ग्राहक पॉल को जब वह अपनी कहानी सुनाती है तो पॉल को लगता है कि दोनों के जीवन की दुर्घटनाओं में एकरूपता और समानता है।  
‘कैराली मसाज पार्लर’ अर्चना पेन्यूली का 2020 में भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित चौथा उपन्यास है। देहरादून की अर्चना 1987 में विवाहोपरान्त मुंबई और फिर 1997 में डेन्मार्क पहुँची। ‘कैराली मसाज पार्लर’ से पहले उनके उपन्यास ‘परिवर्तन’ (2003), ‘वेयर डू आई बिलांग’ (2010) और ‘पॉल की तीर्थयात्रा’ (2016) आ चुके हैं। अर्चना पेन्यूली के पच्चास से अधिक लेख, कहानियाँ, कवितायें और साक्षात्कार प्रकाशित हो चुके हैं। उनके कहानी संग्रह ‘हाईवे ई 47’ 2018 में और ‘कितनी मायें हैं मेरी’ 2019 में प्रकाशित हुए। उन्होंने डेनिश लेखिका कारेन ब्लिक्षण की रचनाओं का हिन्दी में अनुवाद भी किया है। 

सितम्बर 2014 की हंस पत्रिका में अर्चना पेन्यूली की एक कहानी प्रकाशित हुई थी-‘डेरिक की तीर्थ यात्रा’। 2016 में वही उपन्यास का रूप लेकर ‘पॉल की तीर्थयात्र।‘ बन पाठकों के समक्ष पहुंची, जिसे ‘फेमिना सर्वे’ ने 2016 के दस सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में एक घोषित किया। उसी पॉल को हम ‘कैराली मसाज पार्लर’ में देखते हैं। वह नायिका नैन्सी के मसाज पार्लर का प्रथम ग्राहक, मित्रवत कथाश्रोता, और बाद में चतुर्थ पति बनता है। इस मालिश का प्रशिक्षण नैन्सी ने अफ्रीकन मौरीन और बैंगलोर के वेणुगोपाल नांबियार  से लिया है।    

उपन्यास में आरंभ और उपसंहार के अतिरिक्त ग्यारह शीर्षक हैं-1. भारत (एशिया) 2. केन्या (अफ्रीका) 3. डेनमार्क (यूरोप) 4. भारत (एशिया) 5. डेनमार्क (यूरोप) 6. संयुक्त राज्य अमेरिका (उत्तरी अमेरिका) 7. डेनमार्क (यूरोप) 8. भारत (एशिया) 9. डेनमार्क (यूरोप) 10. बहरीन और कतर (अरब जगत) 11. डेनमार्क (यूरोप)। 
अर्चना पेन्यूली ने इसे ग्लोबल उपन्यास कहा है। एशिया-भारत के केरल की बाइस-तेईस वर्षीय नैन्सी 1985 में विवाहोपरान्त अपने पादरी किन्तु अधर्मी पति अब्राहम और गोदी के बच्चे के साथ पूर्वी अफ्रीकी देश केन्या के सागर तटीय नगर मोम्बासा पहुँचती है, जबकि उसका दूसरा पति लार्स हैनसन विश्व के समृद्ध महाद्वीप यूरोप के पच्चास देशों में से एक छोटे से रईस देश डेनमार्क से है। तीसरे फ्रांसीसी पति मार्को के साथ वह फ़्रांस, अमेरिका और बैंगलोर जाती है। अंतत: वह डेनमार्क में अपना मसाज पार्लर बनाती है और चौथे पति पॉल और बेटे आर्यर के साथ वहीं बस जाती है। यानी कथा चार महाद्वीपों तक फैली है। हर बार पति बदलने के साथ नैन्सी को देश भी बदलना पड़ता है। उसका नाम भी हर बार बदलता है-नैन्सी मैथ्यू, नैन्सी कोक्कन, नैन्सी हैन्सन, नैन्सी लेराय, नैन्सी मैथ्यू, नैन्सी पॉल। बेटा जोशुआ पहले पिता के साथ मोम्बासा और नैरोबी में रहता है और फिर कैनेडा में पढ़ाई करने पहुँच जाता है। बहन रेचन एशिया के बहरीन की राजधानी मनापा और भाई जार्ज कतर की राजधानी दोहा में बसे हैं। नैन्सी भी रेचल के बेटे की शादी पर मनापा और भाई के पास कतर आती है। मौरीन केन्या के मोम्बासा यानी अफ्रीका महाद्वीप से है। मौरीन के बेटे अमेरिका में हैं। पुत्रों के कारण अमेरिका आना जाना बना ही रहता है। एशिया के भी कुछ देश घूम चुकी है। पति के साथ भारत यात्रा भी कर चुकी है। मार्को की दादी पोलैंड से है।
 
नैन्सी जिस देश से है, वहाँ विवाह आजीवन निर्वहन का संकल्प है। तलाक की दर दो प्रतिशत है। तलाक सामाजिक रूप से एक धब्बा है और इसकी वैधानिक प्रक्रिया भी सुगम नहीं है। स्त्री के लिए विवाह का रक्षा कवच सांस्कृतिक ज़रूरत है। फिर भी यह पहले पति अब्राहम कोक्कन से शादी के नौ वर्ष के बाद, दूसरे पति लार्स से आठ वर्ष बाद और तीसरे मार्को से सात वर्ष बार तलाक लेती है। क्योंकि पहले पति ने उसके साथ छल किया, वह धर्म गुरु/ पादरी होकर भी मनोरोगी की हद तक औरतबाज, व्यभिचारी निकला, दूसरे ने सभ्य देश डेनमार्क का होकर भी मारा-पीटा, तीसरे फ्रांसीसी ने रईस खानदान से होकर भी एक-एक पैसे के लिए तरसा दिया। हर नई शादी के बाद उसे लगता कि वर्तमान पति से पिछला पति कहीं बेहतर था। 

उपन्यास एकल परिवार के बीच आई दरारों के निष्कर्ष स्वरूप कहता है कि दाम्पत्य सम्बन्धों को ‘फॉर ग्रंटेड’ नहीं लिया जा सकता। सम्बन्धों को बनाए रखने की चाह और कोशिश दोनों तरफ से होनी चाहिए। हर समस्या को मिल-बैठकर सुलझाया जा सकता है। एक-दो-तीन-चार शादियाँ करने वाली स्त्री की समस्याएँ और संघर्ष कहीं दुष्कर है। समाज और परिवार में स्थिति भी सामान्य नहीं रहती। अपनों के साथ ही उसे बार-बार नीम की पत्तियाँ चबानी पड़ती हैं। पति बदलने के साथ-साथ जीवन भी बदल जाता है। अपनी खुशी की तलाश में भटक रही स्त्री नैतिकता के मुखौटे नहीं लगा सकती। नियति ने नैन्सी द्रोपदी का दूसरा संस्कारण बना दिया। नैन्सी यह भी भूल जाती है कि उसके बेटों की खुशी क्या है। वह कैनेडा जोशुआ के पास आती है, पर महसूसती है कि बेटा उसके पास होकर भी कितनी दूर है। अपने बेटों ने भी उसे कोसने से नहीं बख्शा। जोशुआ अकसर गुनगुनाता रहता है, “जब भी जी चाहे नई दुनिया बसा लेते हैं लोग---एक चेहरे पर कई चेहरे चढ़ा लेते है लोग।” जोशुआ के लिए कभी लार्स और कभी मार्को-सौतेले पिताओं को माँ के घर में झेलना काफी कठिन है। पापा का अपनी गर्ल्स और दारू में मस्त रहने से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि किसी औरत को सौतेली माँ बना वे उसके घर नहीं लाये और बेटे के संरक्षण के प्रति वे अपना पूरा उत्तरदायित्व निभा रहे हैं। छोटा बेटा नील भी माँ के पास नहीं पिता मार्को के पास रहना पसंद करता है। जबकि माँ की स्थिति यह है-“कोई हमदर्द नहीं दर्द मेरा साया है। हँसने की चाह ने कितना मुझे रुलाया है।“  

 यह प्रवासी स्त्री की कहानी है। हर प्रवासन उस पर विस्थापन बनकर ही टूटता है। प्रवासन के कारणों पर अर्चना पेन्यूली कहती है, “इतिहास के काल खंडों में तरह-तरह के प्रवासन जुड़े हैं-अन्वेषण-जानकारी या संसाधनों की खोज के उद्देश्य के लिए प्रवासन, धर्म प्रचार के लिए प्रवासन, सुरक्षा हेतु प्रवासन, व्यावसायिक प्रवासन, शैक्षिक प्रवासन......। स्पाउस माइग्रेशन भी होता है।”  नैन्सी का प्रवासन स्पाउस प्रवासन है।

 केरल यानी पहाड़ों और समुद्र के साहचर्य में पली बढ़ी नैन्सी प्रकृति से विशेष अनुराग रखती है। उसका गृहनगर मल्लपुरम छोटी पहाड़ियों और टीलों का क्षेत्र है। तीन नदियां चेलियार, काडलकुंडी और भरतभुजा यहाँ बहती हैं। पति कोल्लम के सैंट थामस चर्च में पादरी है। यह अरबसागर के तट पर अष्टमुखी झील के निकट बसा बन्दरगाह शहर है। समुद्र, झील, मैदान, पहाड़, नदियां, बैक वाटर, घने जंगल-हर दृश्य यहाँ मौजूद है। नैन्सी का पानी के प्रति प्रेम उसे तैरने के लिए प्रेरित करता है और कोच वेद विलास का प्रशिक्षण उसे तैराकी एक्सपर्ट बना देता है। समुद्र के खारे पानी में तैरना उसे तनाव मुक्त करता है। लोग उसे लहरों की बेटी कहते हैं। वह नदी होना चाहती है। अबाध गति से बहना चाहती है। दिसम्बर की कड़ाके की ठंड में वह डेन्मार्क के बर्फीले समुद्र में भी तैरने का आनंद लेती है। चाहती है कि बेटा जोश अंतर्राष्ट्रीय स्तर का तैराक बन ओलंपिक में भाग ले। एलोवेरा के रसीले, गूदेदार पौधों के प्रति भी नैन्सी का स्थायी अनुराग है, एलोवेरा उसका जनून है, परम मित्र है। इसकी अनेक प्रजातियाँ उसके हर घर में ही नहीं, पार्लर में भी यह मौजूद हैं। मार्को के पिता के अंगूरों के बाग हैं। नीना को भी पेड़-पौधों से बहुत प्यार है।

 नैन्सी ने चार महाद्वीपों में जिंदगी जी है और महसूस किया है कि दुनिया की संस्कृतियों में जितनी भिन्नता है, उससे कहीं अधिक समानता है। एक दूसरे के लिए आदर और अपनापन दिखाओ तो सभी अपने हो जाते हैं। इन बहुसांस्कृतिक देशों ने उसके क्षितिज को विस्तार ही दिया। वह भारतीय ईसाई है। मलप्पुरम में जहाँ नैन्सी का घर है वहाँ सुबह-शाम मंदिर के घंटे की टनटनाहट और मस्जिद की अज़ान की आवाजें सुनाई देती हैं। प्रोटेस्टेंट चर्च भी पास ही है। ईसाई के इलावा वह इस्लामी तौर-तरीकों और हिन्दू रीति-रिवाजों से भी परिचित है। दीपावली, ओणम, रमजान, बक़रीद, क्रिसमस, ईस्टर-सभी त्योहार उसके मुहल्ले में मनाए जाते हैं। नमीरा, सकीना, विल्सी, मैरी, इन्दु, उसकी सखियाँ हैं। तीनों संस्कृतियों का यहाँ मेल दिखाई देता है। पादरी की पत्नी होने और चर्च परिसर में आवास होने के नाते बपतिस्मा, ईस्टर, क्रिसमस उसके जीवन का अभिन्न अंग हैं। बैंगलोरे के जौहरी परिवार में हर तीज त्योहार पर मंत्र, पूजन, हवन, कथा, कीर्तन चलते ही रहते हैं। जबकि उसके पति लार्स, मार्को और पॉल यूरोपियन ईसाई है।

भारतीय संस्कृति में हर रिश्ते के लिए एक नाम होता है। (केरल) माँ-अम्मा, पिता-अप्पा, माँ की बहन-कुजम्मा, पिता का भाई पापुन, पिता के भाई की पत्नी-चेरिअम्मा, मौसा-अम्माचन -जब कि विकसित और सभ्य माने जाने वाले पश्चिम में सब को नाम से पुकारते हैं। हाँ! डेन्मार्क में लार्स माँ को मुआ और नानी को मुआमुआ बुलाता है। यूरोप और अमेरिका में नजदीकी रिश्तेदारों से मिलने के लिए भी उनकी इजाजत लेनी पड़ती है, लोग अपनी प्राइवेसी को बहुत महत्त्व देते हैं। जबकि भारत और अफ्रीका में बड़े बूढ़े परिवार के केंद्र में रहना चाहते हैं।

मृत्यु और शादी के संस्कार भी चित्रित हैं। अप्पा की मृत्यु के चौहदवें दिन चर्च में सभी इष्ट मित्रों को शाकाहारी मृत्युभोज दिया जाता है। डेनमार्क में यूं तो संस्कार के लिए पैकेज होते हैं, फिर भी कई रस्में खुद निभानी पड़ती हैं। लोग काले कपड़े पहन कर आते हैं और प्रशस्ति भी प्रस्तुत की जाती है।

आज नैन्सी स्कर्ट, मिडी, जींस पहनती है। अपनी पहली शादी में नैन्सी अपनी सुनहरे बार्डर वाली सफ़ेद साड़ी पहनती है। विल्सी उसकी फ्लावर गर्ल बनती है। दूसरी शादी में सफ़ेद गाउन पहनती है और सिर पर झीना सफ़ेद घूँघट।  तीसरी शादी में सफ़ेद गाउन, सिर पर फूलों की माला और मार्को और नैन्सी के सिर पर चोकोर रेशमी घूँघट/ टॉप सा लगाया जाता है। रेचल के बेटे की मेहंदी में लहंगा चोली, शादी में साड़ी और रिसेप्शन में सलवार कमीज़ पहनती है। मुस्लिम औरतें डिज़ाइनर अबाया हिजाब पहनती हैं।
    
यूरोप में स्त्री-पुरुष का बिना शादी के साथ रहना बहुत ही सामान्य समझा जाता है। नैन्सी से शादी से पहले लार्स दो स्त्रियॉं के संग रह चुका है। लार्स की माँ लारा भी पति के इलावा दो पुरुषों के साथ रह चुकी है। जबकि भारतीय संस्कृति इसकी इजाजत नहीं देती। यह एक नया संसार है, जहाँ 18 वर्षीय बेटा माँ को उसकी तीसरी शादी पर बधाई का कार्ड भेजता है जीवन शैली की भिन्नता, सोच का अंतर, भाषागत भिन्नता, मूल्यगत टकराहट गूंज-अनुगूँज बनकर हर बार नैन्सी को सांस्कृतिक धक्का देती है। भारतीय और पाश्चात्य मूल्यों में छत्तीस का आंकड़ा है। ऐसे में कितना छोड़ना है और कितना लेना है-संभ्रम बना रहता है।

नैन्सी अपने ग्राहकों को ताजे फलों और सब्जियों की ओरगनिक ड्रिंक स्मूथी पीने को देती है। मौरीन को अपनी भारत यात्रा में दहीं, आचार, चटनी के साथ खाये कई प्रकार के भरवां पराठे नहीं भूलते। जबकि प्रवास में अक्सर हर पार्टी में ककटेल ड्रिंक बनाए जाते हैं। नैन्सी पीती नहीं। कैथरीन की पार्टी में मार्को उसके लिए बियर फ्लेवर में लेमन जूस, ऑरेंज जूस और पुदीने के मिश्रण से हल्का ड्रिंक बना कर लाता है।

भारत में जो सहूलियतें उपलब्ध हैं, यूरोप और अमेरिका में तो उनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। यहाँ बाई, कुक, धोबी, प्रेसवाला, मोची, नाई, दर्जी, माली, कार धोने वाला, राशन पहुंचाने वाला मित्रवत पड़ोसी– सब उपलब्ध हैं, सस्ते हैं और ज़िंदगी आसान है। भारत में गरम और ताजा खाना खाया जाता है, यहाँ खाने में वैरायटी रहती है, जबकि डेनमार्क, अमेरिका  में ठंडा और पुराना खाना चलता है। यहाँ एक दिन में अपने सारे टेस्ट करवा सकते हैं, जबकि यूरोप में महीनों इंतज़ार करना पड़ता है। वहाँ घर भी छोटे-छोटे हैं। बाइनलोर के नैन्सी के अपार्टमेंट परिसर में हर सुविधा है-जिम, स्विमिंग पूल, जागिंग  ट्रेक, बेडमिंटन कोर्ट, टेनिस कोर्ट, हरे-भरे उपवन।

पूरे विश्व में, हर महाद्वीप में, सभी-असभ्य देशों में स्त्री को पति पुरुषों द्वारा उत्पीड़ित ही किया जाता है और इस जंग में औरत अकेली ही है। नैन्सी का पहला पादरी/ धर्मगुरु पति अब्राहम भारत में रहे या अफ्रीका में-अपने पर स्त्री सम्बन्धों से, दांपत्य की नैतिकता का अतिक्रमण करके नैन्सी को अपमानित-उत्पीड़ित करने से बाज़ नहीं आता। दूसरा डेनमार्क से सभ्य देश का पति लार्स हिंसा के मानसिक विकार से पीड़ित/ कुंठित है। वह उस पर हाथ उठाता है, थप्पड़ मारता है, गालियाँ बकता है, बाल खींचता है, बांह मरोड़ता है, धक्के देता है, जूते चलाता है, लहूलुहान करता है, मुँह पर थूकता है, अस्पताल पहुंचा देता है। क्या उत्पीड़न ही पत्नी की नियति है। ज्वलंत प्रश्न है कि ऐसी स्थिति में वह स्वयं को बचाए या शादी को ? लाचार पत्नी से अकेली औरत होना क्या बेहतर विकल्प नहीं है? डेनमार्क के महिला आश्रय गृह की 21 से 65 वर्ष की सभी स्त्रियाँ इसी त्रासदी का शिकार हैं। लेबनान से आई इक्कीस वर्षीय जन्नत का पति उसे वेश्यावृत्ति में धकेलने का मंसूबा लिए है। मना करने पर पीटता है, सुलगती सिगरेट से दागता है, स्टोव से चिमटा गरम करके उस पर बरसाता है। पाकिस्तान की बेनज़ीर का पति शराब पीकर पीटता भी है और शराब के लिए सारे पैसे/ बचत छीन लेता है। घाना की अबीना का पति उसे डायन या चुडैल कह कर पुकारता है। सिख महिला जसबीर का पति उसके पेट में छुरा घोंप देता है। नानी दादी बन चुकी बासठ वर्षीय फारसी महिला फिरोज़ा दरिंदे पति के कारण इस पनाहगार में है।

उपन्यास एक स्त्री के 29-30 वर्षों के जीवन की उथल-पुथल लिए है। ऐसे में यहाँ दर्जनों पात्र आए हैं। जैसे; नैन्सी का मलप्पुरम का परिवार और पड़ोसी – कुजम्मा (सूजन), कोशी मैथ्यू, सांद्रा मैथ्यू, नील, जार्ज, रीबा, रेचल, ल्यूका, जोजफ, ओर्नेला, थामस, जैनब, पापुन, चेरिअम्मा, विल्सी, सकीना, अनास, शफीक, असरफ अंकल, रूबी आंटी। नैन्सी के पति और उनका परिवार-अब्राहम कोक्कन, लार्स हैनसन, मार्को लेराय, पॉल। लार्स की नानी ग्रेथा, मामा फिलिप, माँ लारा, पिता डेनियल, मामी कमिला।  मार्को लेराय के पिता बरनार्ड, माँ अलीसा, बहन नीस। पॉल की पत्नी नीना और पॉल की बेटियाँ, नीना के माता-पिता। नैन्सी के बेटे और उनके मित्र-जोशुआ और नील, आर्यर; मित्र-कर्तार सिह, मीयूंग डांग, शुभम। नैन्सी के मसाज गुरु-मौरीन टाड, वेणुगोपाल नाम्बियार। पड़ोसी-कार्ल, एल्फ, सुफान-ली, बैंगलोर का जौहरी परिवार। नैन्सी की सखियाँ-रोज, मार्या, बेलिंडा, रीम, कैथरीन, डेनिएला तथा वकील सोफिया लांगे, लीडर अन्नेता, अचारा आदि।

‘कैराली मसाज पार्लर’ मात्र कथा विधा के कलेवर में सिमटा एक उपन्यास नहीं है। अर्चना पेन्यूली के सूक्ष्म विवरण अपने पाठकों के मन; जगत को भिन्न महाद्वीपों की जीवन्त यात्रा का रस-स्वादन भी करवा रहे हैं। भारत, बैगलोर, वाईट फील्ड, रैफल्स पार्क, केरल, मलप्पुरम, मालाबार, अरिकोड इलाका, चेरियार नदी, पताम्बी, तिरुवनंतपुरम, कालीकट, अरीकोट, सऊदी अरब, मोम्बासा, तिरुर, कतर, मंसोरा, मानव निर्मित द्वीप पर्ल, बहरीन, मनामा, अल मुहर्रक द्वीप, तुब्ली, रिफ्फा, दोहा, कोल्लम, अष्टमुडी झील, न्याली, बम्बुरी, हाललेर पार्क, डेनमार्क, कोपनहेगन, जटलैंड का नगर सोंडारबोर्ग, हेल्लेरूप, टीवोली गार्डेन, फ़्रांस के नीस नगर का गाँव फोंटन , उत्तरी अमेरिका – एमराल्ड सिटी, सिएटल,  कैनेडा-ब्रिटिश कोलम्बिया, वैंकूवर, सर्री, ग्रीनवुड, पोलैंड आदि द्वीपों, देशों, शहरों, स्थानों की यात्रा करती पाठकीय जिज्ञासा उपन्यास में पूर्णत: निमज्जित हो जाती है। वात-पित-कफ को संतुलित कर पूर्ण स्वास्थ्य की ओर ले जाने वाली केरल की पाँच हज़ार साल पुरानी मसाज भी पाठक का ध्यान आकर्षित करती है।
  
 श्रोता, पार्लर के प्रथम ग्राहक, और नैन्सी के चौथे पति के रूप में पॉल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वह अपनी पूर्व पत्नी नीना की प्रथम पुण्य तिथि के लिए 108 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर श्रद्धांजलि देने गया था। घायल पाँवों और थके शरीर के उपचार के लिए वह ‘कैराली मसाज पार्लर’ आता है। उसकी मसाज करती नैन्सी अपनी जीवन गाथा सुनाने लगती है-कोख से दुनिया तक, वोंब टु वर्ड। नैन्सी की कथा सुन रहा पॉल मूक श्रोता नहीं है। ऐसी ही बातें उसके साथ भी घटित हुई हैं और वह बहुत सी घटनाओं को अपने जीवन के साथ जोड़ता जाता है। नैन्सी तीन संस्कृतियों के बीच पाली-बढ़ी है, तो स्कॉटलैंड का पॉल डेनमार्क में रहता है। उसकी परदादी भारत के मराठा राजसी परिवार से थी और पत्नी नीना भारतीय थी। दोनों के प्रवासन स्पाउस प्रवासन है। वैवाहिक जीवन के कड़े अनुभव और दो बार तलाक का दंश वह नैन्सी की तरह ही झेल चुका है। नैन्सी पति लार्स से बच्चा चाहती है और नीना भी चाहती थी कि उसका और पॉल का एक बच्चा हो। नैन्सी की माँ की मृत्यु ब्रेस्ट कैंसर से हुई थी और पॉल की दूसरी पत्नी नीना की लंग कैंसर से। लार्स की मामी कमिला की मृत्यु के प्रसंग में भी पॉल को मृत्यु शैय्या पर हड्डियों के ढांचे सी पड़ी नीना याद आती है। तलाक के बाद जोशुआ को पिता के पास रहना पड़ता है, तो पॉल की बेटियाँ भी माँ के पास रही। नैन्सी के पार्लर में जगह-जगह एलोवेरा सजे देख उसे नीना का पेड़-पौधों के प्रति प्रेम स्मरण आता है। नीना का प्रिय पेड़ कस्तूरा था। नैन्सी की तरह वह भी स्पाउस प्रवासन के कारण विदेश आया। स्पाउस के कारण अपना घर, परिवार, नौकरी, वतन –सब छोड़ा, फिर भी प्रेम की परिभाषा पर पूरी तरह फिट नही हो पाया। दोनों एक ही नौका पर सवार हैं। न पॉल को कभी स्कॉटलैंड में बसने का ख्याल आया और न नैन्सी को भारत। शुभचिंतक कुजम्मा की उपेक्षा के प्रसंग में पॉल की भी नीना के माता-पिता और बेटियों द्वारा मिलने वाली उपेक्षा टीसने लगती है। जैसे नैन्सी को लार्स के घर से अपना सामान उठाना पड़ा, वैसे ही एक दिन पॉल को नीना के घर से अपना सामान उठाना पड़ा था। नैन्सी की तरह उसे भी डांस करना बहुत पसंद है।

नैन्सी कम्प्युटर एक्सपर्ट है। बी. एस. सी. है। तैराकी में उसका कोई मुक़ाबला नहीं। मोम्बासा और बैंगलौर में उसने मसाज कला के अनेकों गुर जाने हैं। मोम्बासा में वह एक इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाती रही  है। डेन्मार्क में भी स्कूल अध्यापिका रही है। पति मार्को के कारण उसे नौकरी छोड़ अमेरिका जाना पड़ा। दोबारा नौकरी मिली नहीं। वह मसाज पार्लर खोलती है। वह मसाज विशेषज्ञ, बॉडी वर्कर है। यह मालिश वात-पित्त, कफ को संतुलित करती है। अब नैन्सी मालिशवाली, मसाज थेरेपिस्ट, बॉडी वर्कर है। यह ‘आयुर्वेदिक हीलिंग रिज़ॉर्ट’ एक स्त्री का पार्लर है, लेकिन यह यूनिसेक्स है। यहाँ पुरुष-स्त्री दोनों ग्राहक आ सकते हैं, यानी चुनौतीपूर्ण पेशा है।

स्थानीय शब्द भी आए हैं-हालेलुइया, शंगजी, मुआ, मुआमुआ, टिल्लालुका, थक, हयूगे, हयुग्लिग्त , नाकूपेंदा, वेल्बीकम आदि। 

सूत्र वाक्य लेखिका की भाषा के नगीने हैं- 
1. यूरोप अफ्रीका नहीं है, वहाँ एशियन इमिग्रेन्त्स की कोई इज्जत नहीं।  65        
2. कुछ सच इतने कडवे व वीभत्स हैं कि उन्हें उगलने की हिम्मत नहीं पड़ती। 
3. ज़िंदगी में कोई चीज़ जब हमें अनपेक्षित कोने से मिलती है तो वह बिना कीमत की नाही होती। 
4. आध्यात्मिक अभ्यास व्यक्ति के भीतर नम्रता और सेवाभाव लाता है। 
5. प्रेम अलौकिक होता है, मगर जब लोक में आता है तो जिम्मेदारियों से घिर जाता है। 
6. आप कैसा विवाह करते हैं, यह मायने नहीं रखता, आपकी शादीशुदा ज़िंदगी कैसी चल रही है, यह महत्वपूर्ण है।    
7. सेक्स और प्यार के बीच एक एसपीएसएचटी अंतर है। सेक्स एक शारीरिक गति विधि है। प्रेम में भावनाएं, अंतरगता शामिल रहती है। 
8. ज़िंदगी में आत्मनिर्भरता अत्यन्त आवश्यक है। मनुष्य को दूसरों पर भरोसा न कर आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी होना चाहिए।   
9. लोग देह से ही मरीज नहीं होते। मस्तिष्क, आत्मा, सोच और व्यवहार से भी मरीज होते हैं।  
10. बीमारी और मौत की कोई उम्र नहीं होती। जब एक व्यक्ति मारता है तो सिर्फ एक ज़िंदगी नहीं जाती, की ज़िंदगियाँ खत्म हो जाती हैं। 
11. आसान नहीं है जीवन का हर किरदार निभाना। खुद बिखरना होता है रिश्तों को समेटने के लिए।  
12. जहाँ अच्छा वक्त हमें खुशी देता है, वहीं बुरा वक्त हमें मज़बूत बनाता है।  
13. नदी में गिरने से मौत नहीं होती। मौत तब होती है जब हमें तैरना नहीं आता।  
14. शादी एक ऐसा संकल्प है, जिसमें पति और पत्नी दोनों के लिए एक दूसरे को समझना और एक दूसरे का सम्मान करना बेहद जरूरी है। 
15. मौत सबसे असाधारण घटना है। कोई भी मृत्यु के रहस्य को नहीं जानता।     
16. हर अंत एक शुभारंभ होता है।  
नैन्सी उन लोगों में है, जो अपने देश में गुजारा समय याद करते हैं, अपने लोगों से मिलना चाहते हैं, इंडियन पासपोर्ट ही रखते हैं, मगर भारत वापिस जाकर बसने का ख्याल कभी नहीं आता। वहाँ भटकते हैं, अपने ही जीवन के मूल्य पर प्रयोग करते हैं, मातृभूमि और सगे-संबंधियों के मोह में स्वदेश आते हैं, पर जड़ों से उखड़े बिरवे कहाँ पनप सकते हैं ? लौटना ही, प्रवास ही उनकी नियति और उपलब्धि है।  
संदर्भ
  1.    अर्चना पेन्यूली, कैराली मसाज पार्लर, भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली, 2020, पृष्ठ 68 
  2.    वही, पृष्ठ 65 
  3.    वही, पृष्ठ 23 
  4.    वही, पृष्ठ 28 
  5.    वही, पृष्ठ 30
  6.    वही, पृष्ठ 31 
  7.    वही, पृष्ठ 33 
  8.    वही, पृष्ठ 37  
  9.    वही, पृष्ठ 47
  10.    वही, पृष्ठ 56
  11.    वही, पृष्ठ 58 
  12.    वही, पृष्ठ 91 
  13.    वही, पृष्ठ 139 
  14.    वही, पृष्ठ 201 
  15.    वही, पृष्ठ 203  
  16.    वही, पृष्ठ 209 
  17.    वही, पृष्ठ 231 
 

1 comment :

  1. धन्यवाद मधु संधू जी और सेतु के सम्पादक

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