हरिकृष्ण देवसरे के उपन्यास 'चंदू के कारनामे' में वैज्ञानिकता का अध्ययन

चौहान अनुराधा

शोधार्थी, हिंदी विभाग, भाषा साहित्य भवन, गुजरात यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद 56
चलभाष: +91 960 197 8235; ईमेल: annulovesmom@gmail.com

 वैज्ञानिक चेतना से सम्पन्न साहित्य की रचना करने वाले साहित्यकार डॉ० हरिकृष्ण देवसरे का जन्म 9 मार्च 1940 को मध्यप्रदेश के नागोद में हुआ था। देवसरे जी ने जबलपुर विश्वविद्यालय से 'हिंदी बाल साहित्य एक अध्ययन' विषय पर शोध प्रबंध लिखकर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी। उसके साथ ही हिंदी बाल साहित्य के क्षेत्र में प्रथम पीएचडी कर्ता के रूप में अपना नाम दर्ज करवाया। 

 डॉ० हरिकृष्ण देवसरे जी ने हिंदी बाल साहित्य को उत्कृष्ट कोटि की रचनाएँ प्रदान की, जो वैज्ञानिक फेंटेसी पर आधारित है। उन्होंने बाल साहित्य से भरी अनेक राजा-रानी, जादू - टोने, भूत- पिशाच तथा अंधविश्वासों से भरी कहानियों से बच्चों को दूर करने के लिए जो आंदोलन चलाया था, वह आंदोलन इतिहास के पन्नों में दर्ज है। परंतु वर्तमान पीढ़ी इससे अनभिज्ञ है, वर्तमान पीढ़ी को इन रचनाओ से परिचित करवाना हमारा कर्तव्य है।
 
 डॉ० हरिकृष्ण देवसरे ने बाल कहानियों को समृद्ध बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बच्चों के लिए विज्ञान लेखन को बढ़ावा देने के लिए तथा उसे रोचक बनाने के लिए फेंटेसी का प्रयोग किया है। डॉ. देवसरे की वैज्ञानिक फेंटेसी पर आधारित रचनाएँ "गिरना डिस्कवरी यान", "धूएँ की घाटी", "आओ चंदा के देश चले", "मंगल ग्रह पर राजू", "चंदू के कारनामे", "स्वान यात्रा", "लावेनी" आदि है।

 डॉ० देवसरे को बाल साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के कारण कई संस्थाओ द्वारा सम्मानित और पुरस्कृत भी किया गया हैं। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने 'बाल साहित्य भारतीय पुरस्कार' और हिंदी अकादमी दिल्ली ने 'साहित्य सम्मान' से देवसरे जी को पुरस्कृत किया है। साथ ही देवसरे जी को प्रथम वात्सल्य पुरस्कार पद्माबिनानी फाउंडेशन के द्वारा प्रदान किया गया हैं।

 साहित्य समाज का दर्पण होता है, समाज को साहित्य से ज्ञान की प्राप्ति होती है। हर युग में साहित्यकारों के द्वारा साहित्य लिखा जाता है, साहित्य ने मानव जीवन को सुखमय और सरल बनाया है।

चार्ल्स नाडिया ने कहा है कि "साहित्य समाज की अभिव्यक्ति है।"1 
रॉबर्ट लार्ड लायटन के विचार से "किसी भी राष्ट्र का साहित्य सदैव उसके मानव- समाज का जीवन-चरित्र है।"2

 उपर्युक्त उद्धरण बताते हैं कि किसी विशेष कालखंड में लिखे गए साहित्य से हमें उस काल के समाज के बारे में पता लगता है। इसलिए आधुनिक साहित्य में आज के वैज्ञानिक युग की छाप दिखाई देनी चाहिए। डॉ० हरिकृष्ण देवसरे की बाल कहानियों, विज्ञान कथाओं और उपन्यासों में विज्ञान की झलक साफ-साफ दिखाई देती है।

 इस शोध-पत्र में डॉ० हरिकृष्ण देवसरे के उपन्यास "चंदू के कारनामे" में स्थित वैज्ञानिक तथ्यों का अध्ययन किया गया है। जिसे इस उपन्यास के अलग-अलग खंडों में चंदू और वैज्ञानिक चाचा ने विभिन्न उदाहरणों द्वारा समझाया है।

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 चंदू के कारनामे

 चंदू के कारनामे यह हरिकृष्ण देवसरे का एक प्रसिद्ध उपन्यास है। इस उपन्यास मे उन्होंने वैज्ञानिकता से जुड़ी हुई अनेक बातों का विस्तृत परिचय प्रदान किया है। "बिल्ली का जादू", "जादू का कुत्ता", "आंधी तूफान वाला भूत", "जादू की खोपड़ी", "जादू भरी गुफा","जादू का पत्थर", आदि खंडों के द्वारा देवसरे जी ने वैज्ञानिक तत्व को बड़ी ही सरलता से समझाया है। इस प्रकार की रचनाओं के अध्ययन और अध्यापन के द्वारा बच्चों की कल्पना शक्ति को बढ़ाते है, वे भी किसी प्रकार का सृजन कार्य करे ऐसे विचार उनके मन में उत्पन्न करते हैं। 

 
1.1 बिल्ली का जादू

 "बिल्ली का जादू" इस खंड में देवसरे जी ने बिल्ली से जुड़ी अनेक बातों का निराकरण किया है जो बच्चों के मन में अक्सर उठते रहते हैं।"3 जैसे उनकी आँखें रात को चमकती क्यों है? किस प्रकार हमारी आँखें बिल्ली की आँखों से भिन्न होती हैं? इन सभी कोतुहल पूर्ण प्रश्नों का उत्तर बड़े ही आसान शब्दों में दिया हैं। बिल्ली की आँखें रात को ज्यादा चमकती है उसके पीछे का कारण होता है उनकी आँखों में स्थित कॉर्निया होता है, जिसकी कार्यपद्धती मानव आँखों से भिन्न होती है। इसी वजह से बिल्लियाँ दिन के मुकाबले रात्रि में ज्यादा देख सकती हैं। इसके साथ-साथ हमारी आँखें किस प्रकार कार्य करती है उनमें रेटिना की क्या भूमिका होती है?लेंस का क्या कार्य होता है? कॉर्निया किस प्रकार कार्य करता है?इन सभी बातों को भी बड़े सरलता से समझाया है।

1.2 जादूगर चंदू

प्रस्तुत खंड में देवसरे जी ने घर्षण के महत्व को समझाने का प्रयास किया है। उनके अनुसार जब हम चलते हैं तो जमीन और हमारे पांव के बीच घर्षण उत्पन्न होता है, जमीन हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं, इस पांव और जमीन के घर्षण बल के कारण हम अगला कदम उठा पाते हैं। घर्षण के अन्य उदाहरण हरिकृष्ण देवसरे के शब्दों में इस प्रकार हैं

"अगर पटरियों पर रगड़ न हो तो ट्रेन चल नहीं सकती। जब पटरियों की रगड़ ट्रेन के पहियों को रोकेगी और इंजन उन्हें खींचेगा तभी गाड़ी लुढ़केगी वरना फिसल जाएगी। इसी तरह पटरियों की रगड़ उन्हें न रोके तो ब्रेक लगाने के बाद भी गाड़ी लुढकती चली जाए।"4

फुटबॉल को पैर से मारने पर वह तभी तक आगे लुढ़कती जबतक कि उसमें घर्षण बल है, जब हम हाथों से किताब पर लिखते हैं उस वक्त भी हमारी पेन उस किताब के साथ घर्षण करती है। जब हम किसी गाड़ी से भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं, तब हमारी गाड़ी में जमीन के साथ घर्षण करते हुए आगे बढ़ती है।ये सभी कार्य घर्षण बल की मदद से ही होते हैं। 
 
1.3 जादू का कुत्ता 

 प्रस्तुत खंड में देवसरे जी ने मनुष्य और जानवरों के सुघंने की शक्ति क्यों अलग होती है, उसे सरलता से समझाने का प्रयास किया है। जिसे हम निम्न उक्ति में देख सकते हैं।

 "हर जीव के दिमाग में ऐसे केंद्र होते हैं, जो शरीर के हर काम को कंट्रोल करते हैं। जैसे देखने का काम आँखें पूरा करती हैं। लेकिन उन पर बनने वाली तस्वीर का परिचय दिमाग का वह केंद्र देता है जो आँखों का काम कंट्रोल करता है। उसी तरह सूंघने का काम कंट्रोल करने वाला भाग भी दिमाग में होता है। यह सूंघकर उस महक का परिचय देता है और उसे याद करता है।"5 

 उन केंद्रों में कुत्तों का सुंघने का दायरा बड़ा होता है जबकि हम मनुष्यों का वह दायरा छोटा होता है। इसी वजह से वह किसी भी सुंघी हुई चीज को लंबे समय तक याद रख सकता है और उसे वापस सुंघ कर पहचान सकता है। इस प्रकार से कुत्ते अपराधियों को पकड़ने में पुलिस की मदद करते हैं।

1.4 आंधी तूफान वाला भूत

 प्रस्तुत खंड में हरिकृष्ण देवसरे जी ने हवा का दबाव कम या ज्यादा होने पर तूफान की स्थिति कैसे उत्पन्न हो जाती है इस बात को समझाया है। उनके अनुसार,

 "जब कहीं भी हवा गर्म होकर हल्की हो जाती है और ऊपर उड़ जाती है तो उस खाली स्थान को भरने के लिए दूसरी तरफ से हवा आती है चूंकि वह खाली जगह में आती है इसलिए उसकी गति तेज हो जाती है। अब अगर पूरे शहर के ऊपर फैले वायुमंडल में यानी चार-छह किलोमीटर के घेरे में अचानक मौसम ऐसा हो जाए कि हवा का दबाव कम हो जाए तो किसी दूसरे स्थान से हवा जहाँ हवा ज्यादा होगी, उस स्थान को भरने के लिए हवा आएगी। उस समय उसकी गति काफी तेज होगी और इसलिए उसका रूप बहुत भयानक होता है जिसे हम आंधी या तूफान कहते हैं। जब तक हवा का स्थान पूरा नहीं हो जाता और हवा की गति शांत नहीं हो जाती आंधी चलती रहती है।"6 

 उन्होंने यह भी बताया कि बैरोमीटर नामक यंत्र की मदद से ही मौसम विभाग इन आपात स्थितियों की पूर्वघोषणा करता है। जिससे व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया जाता है

1.5 जादू की खोपड़ी

 प्रस्तुत खंड में हरिकृष्ण देवसरे जी ने चुंबक में किस प्रकार की शक्तियाँ होती हैं यह बताने का प्रयास किया है, चुंबक में दो ध्रुव होते हैं एक उत्तर तथा दूसरा दक्षिण जिसके द्वारा इस खंड में खोपड़ी को आगे- पीछे तथा गोल गोल घुमा कर चंदू ने जादू प्रदर्शित किया है। जिसे हम चंदू जो मुन्नी खान के रूप में नाटक प्रस्तुत करने के लिए उपस्थित है। उसका कथन के माध्यम से देख सकते हैं।

"यह खोपड़ी तेलिया मसान की है इसको मैंने तीन महीने में जगाया है। इससे जो काम कहो करता है। कोलकाता मुंबई की बातें बताता है, तरह-तरह की मिठाइयाँ खिलाता है और मेरी पूरी आज्ञा मानता है।लेकिन यह सब इस जादुई डंडे के सहारे होता है। इसे इस डंडे का बहुत डर है। दरअसल मैंने इसे इसी से काबू में किया है। 
फिर मुन्ने खाने उसके सामने डंडा हिलाते हुए पूछा -, "क्यों मसानू ठीक है ना?"और खोपड़ी ने सामने को सिर हिलाकर कहा - "हाँ।"
"अच्छा,एक बात बताओ, ससुराल जाओगे?"
" हाँ। " मानू ने सिर हिलाया।
"क्या लाओगे?"
इस पर मसानू ने शरमाकर कर गरदन झुका ली।
"अच्छा, तो शरमा गए।" मुन्ने खाँ ने कहा। बच्चे खिलखिला कर हँस पड़े।
"अच्छा मसानू, अगर तुम्हें दुल्हन मिल जाए तो तुम क्या करोगे?"
इस पर मसानू जोर-जोर से घूम-घूम कर नाचने लगा।
"अरे वाह, भाई, तुम नाच भी दिखाते हो!" "7

1.6 जादूभरी गुफा

 प्रस्तुत खंड में हरिकृष्ण देवसरे जी ने चंदू की सूझबूझ को बताने का प्रयास किया है, किस प्रकार उसने अपनी सूझबूझ के बल पर अपने दुश्मनों(वीरू और कल्लन) को अच्छा पाठ पढ़ाया। इस गुफा में उसने एक लाउडस्पीकर छिपा कर फीट कर दिया था वक्त आने अपने दोस्तों की मदद से उन सब को डराता है। जब सब बच्चे अंदर गुफा में रहते हैं तब चंदू के दोस्त लाउडस्पीकर की मदद से अपनी डरावनी आवाज निकालते हैं। चंदू के दोस्तों का कथन कुछ निम्नानुसार हैं।
 "अब तुम सब मेरी कैद में हो। मैं अभी अपने देवों को भेजता हूँ। तुम सब की वह बोटियाँ-बोटियाँ नोच डालेंगे। तुमने यहाँ आने की हिम्मत कैसे की!"
"पर महाराज, आप कौन है?" वीरू ने कहा। 
"नादान बच्चे! मेरे घर में आकर पूछता है कि मैं कौन हूँ! अगर तू मुझे देखेगा तो घबरा जाएगा। समझा"।
"पर..पर...हम तो सीधे-साधे बच्चे हैं।" वीरू ने कहा। 
"हाँ ...हाँ ...हाँ... बड़े भोले बनते हो। अपने ही साथी को पीटने का बहाना बना कर आए हो और कहते हो, हम सीधे हैं। बदमाश, मैं तुम लोगों को गरम लोहे की छड़ों से जला दूंगा। सावधान हो जाओ।" 
"अरे बाप रे…! एक बच्चे के मुँह से चीख निकल गई।"8


1.7 जादू का पत्थर

 प्रस्तुत खंड में हरेकृष्ण देवसरे जी ने हीरों के निर्माण की प्रक्रिया को समझाया है। उन्होंने यह भी बताया है की पृथ्वी के अंदर खानों में से निकलने वाला हीरा भी एक प्रकार का कोयला ही है, जिसे किंबरलाइट चट्टान के रूप में जाना जाता है। हीरे के निर्माण की वैज्ञानिक कहानी जादूगर चाचा ने जो चंदू को बताई थी वह निम्नानुसार है।

"वैज्ञानिकों ने खोज करके यह सिद्ध किया है कि हीरा, कोयले की है किस्म है जो जमीन में बहुत गहराई पर पाया जाता है। यह 'किंबरलाइट' नामक चट्टान के अंदर निकलते हैं। जब कोयला अधिक से अधिक गर्मी में लाखों सालों तक भूमि में बहुत गहरे दबाव रहता है तब वह किंबरलाइट चट्टान में परिवर्तित होता है। इसी चट्टान का कोई-कोई हिस्सा हीरे में बदल जाता है।"9

1.8 निष्कर्ष

 निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि हरिकृष्ण देवसरे एक सफल वैज्ञानिक कथाकार है। जिनके उपन्यास तथा विज्ञान कथाओं में वैज्ञानिकता साफ-साफ दिखाई देती है। चंदू के कारनामे में अलग-अलग कारनामे जो चंदू ने वैज्ञानिक चाचा की मदद से किया है वह किसी जादू से कम नहीं है। इसलिए हमें बचपन से ही बच्चों को अंधविश्वास से भरी कहानियों के बदले वैज्ञानिक तथ्यो से जुड़ी हुई कहानियाँ सुनानी चाहिए। जो बचपन से ही उनमें विज्ञान के प्रति उत्सुकता जागृत करेगी। किसी भी अंधविश्वास को मानने से पहले उन्हें तर्क करने की सीख देंगी। इस तरह एक अच्छे भविष्य का निर्माण में करने में हमारी सहायता करेगी।
 

संदर्भ:
 1. 'संपूर्ण बाल विज्ञान कथाएँ', डाक्टर हरिकृष्ण देवसरे, अमर सत्य प्रकाशन, 2019, पृष्ठ 5
 2. वही, पृष्ठ 5
 3. वही, पृष्ठ 79
 4. वही, पृष्ठ 91
 5. वही, पृष्ठ 97
 6. वही, पृष्ठ 103
 7. वही, पृष्ठ 108
 8. वही, पृष्ठ 113
 9. वही, पृष्ठ 116

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