मोरबी का दु:खद सेतुक्षय

कल मोरबी गुजरात में मच्छू नदी पर बना एक पैदल झूलता पुल टूट गया। मरम्मत के बाद यह पुल खुला ही था कि लगभग 400 पर्यटक इसे देखने पहुँच गये थे। स्थानीय मछुआरों सहित जीवनरक्षक खबर मिलते ही घटनास्थल पर पहुँच गये थे लेकिन फिर भी इस दुर्घटना में 135 लोगों की मृत्यु का दु:खद समाचार मिला है, अनेक लापता हैं।

निश्चित रूप से यह पुल 400 लोगों (लगभग 28 टन) का भार भी सहन नहीं कर सका। समाचार अत्यधिक पीड़ा दायक है लेकिन खबरें सुनते समय एक बार भी यह बात पता नहीं चली कि पुल की भार क्षमता कितनी थी यह पुल एक यात्री-आकर्षण था जिसे देखने के लिये लोग दूर-दूर से आते थे। नगर पालिका द्वारा आधिकारिक एक निजी कम्पनी पुल के लिये 17 रुपये प्रति यात्री टिकट भी ले रही थी। भारत भर में व्याप्त अव्यवस्था का यह एक शर्मनाक उदाहरण है जहाँ संस्थानों को अपने संसाधनों की क्षमता की जानकारी नहीं है, दुर्घटना की स्थिति में चलाये जाने वाले सुरक्षा कार्यक्रम की तैयारी नहीं है, और जनजीवन के प्रति पूर्ण अनादर रखते हुए धनार्जन ही कारोबार के केंद्र में है।
 
233 मीटर लम्बा और 4.6 फ़ुट चौड़ा यह "झूलतो पुल" 1880 में आयातित सामग्री से साढ़े तीन लाख रुपये में बना था, और 1889 में इसका आधिकारिक उद्घाटन मुम्बई के राज्यपाल रिचर्ड टेम्पल द्वारा किया गया था। सन 1930 में उद्घाटित, 450 फ़ुट लम्बे और 6 फ़ुट चौड़े लक्ष्मण झूले की तुलना में यह पुल अधिक पुराना और छोटा था लेकिन कुछ समय बंद रहने के बाद दो करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत कराकर लगभग एक सप्ताह पहले ही पर्यटकों के लिये फिर से खोला गया था।

मृतक वापस नहीं आ सकते लेकिन इस दुर्घटना से सबक लेकर लक्ष्मण झूला सहित ऐसे सभी पुलों पर सुरक्षा की दृष्टि से निम्न न्यूनतम प्रबंध अनिवार्य किया जाना चाहिये -
  • क्षमता का अभियांत्रिक आँकलन करके वह संख्या पुल के दोनों प्रवेशद्वारों पर अंकित की जानी चाहिये।
  • प्रवेश व निकास के मशीनीकरण द्वारा पर्यटकों की संख्या और अनुमानित भार को सुरक्षित सीमा में रखा जाना चाहिये
  • सम्भावित दुर्घटनाओं की स्थिति में किये जाने वाले प्राथमिक रेस्क्यू मिशन और सहायता मांग की सटीक व्यवस्था होनी चाहिये
  • रेस्क्यू मिशन और सहायता मांग की सटीक व्यवस्था का नियमित अंतराल पर परीक्षण हो
  • नगरपालिकाओं और उनसे जुड़ने वाली निजी संस्थाओं को मानव जीवन का मूल्य समझने की शिक्षा और सहमति की अनिवार्यता
  • कारगर प्रशासन व्यवस्था जो ऐसी जानलेवा दुर्घटनाओं को होने से पहले ही कड़ाई से रोक सके

कुछ ऐसी ही दु:खद घटना अभी दक्षिण कोरिया में हुई जहाँ हैलोवीन मनाती एक भीड़ की भगदड़ में डेढ़ सौ लोग मारे गये। व्यवस्था और समझ से इस प्रकार की दुर्घटनाएँ रोकी जा सकती हैं, रोकी जानी चाहिये। 

श्रीलंका के आर्थिक पतन के बाद अब पाकिस्तान की हालत पस्त होने की खबरें आ रही हैं। दोनों देशों की दुर्गति कई मामलों में भिन्न होते हुए भी चीन से कड़ी शर्तों पर लिये गये ऋण उनका एक कॉमन फ़ैक्टर हैं। नियंत्रित राजनैतिक व्यवस्थाओं द्वारा लुभावने सब्ज़बाग़ दिखाकर मुक्त-व्यापार वाले लोकतंत्रों को तबाह करने के चीनी उदाहरण अफ़्रीकी देशों में आम थे लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप के देशों की आर्थिक दुर्गति में चीनी अर्थतंत्र का दखल और अब दिखने आरम्भ हुए उसके दुष्परिणाम चिंतनीय हैं, और इनसे हमें शिक्षा लेने की आवश्यकता है।

इस दीवाली पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा वनवेब इंडिया-1  (या एलवीएम3 एम2) मिशन द्वारा 36 संचार उपग्रहों का प्रक्षेपण करके विश्व को दीपावली का अनूठा उपहार दिया। 43.5 मीटर लंबे जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट द्वारा इसरो ने इन उपग्रहों को सफलतापूर्वक निर्धारित कक्षाओं में स्थापित कर दिया।

इसी माह ब्रिटेन ने भारतीय मूल के ऋषि सुनाक को प्रधानमंत्री चुनकर एक इतिहास रचा है। जो राजतंत्र कभी रंगभेद, ड्रग ट्रेड, मानव तस्करी, बलात धर्मांतरण, युद्ध-अपराध, अनधिकारिक हस्तांतरण, अमानवीय विभाजन सहित अनेक कुकृत्यों के लिये बदनाम था, वहाँ आज ऋषि सुनाक का इस महत्त्वपूर्ण पद पर पहुँचना विश्व के एक वैश्विक ग्राम में बदलने का प्रतीक है। चीन व उत्तर कोरिया जैसी तानाशाहियों की उपस्थिति के बावजूद यह सुखद परिवर्तन विश्वभर में चुनाव-आधारित लोकतंत्र के निखरते स्वरूप के प्रति नयी आशा जगाता हैं।

यहाँ अमेरिका में कल हर ओर बच्चे तरह-तरह के वस्त्र पहनकर हैलोवीन मना रहे थे। उनकी ट्रिक और ट्रीट मुझे 'हमारा टेसू यहीं खड़ा, खाने को मांगे दही बड़ा' की याद दिला रही थी। उससे पहले श्राद्ध, महालय, नवरात्रि, दशहरा, दीवाली, भाईदूज आदि के साथ पर्वों की जो शृंखला शुरू हुई है वह क्रिसमस, हाँउका, क्वांज़ा से होती हुई मकर संक्रांति तक चलने वाली है। पर्वों के इस उल्लास के बाद तो वसंत का प्राकृतिक उल्लास ही सामने आने वाला है।

अंत में, एक चुनौती के तहत मात्र 24 घंटों में लिखी गयी मेरी एक लम्बी कहानी ईपुस्तक के रूप में अब से लेकर 4 नवम्बर 2022 तक (भारतीय समयानुसार 5 नवम्बर को सुबह के 10:30 बजे तक)  मुफ़्त डाउनलोड के लिये उपलब्ध है। इस अवसर का लाभ उठाइये: 

आपके जीवन में उल्लास सदा बना रहे, इसी कामना के साथ,    
आपका शुभाकांक्षी,
सेतु, पिट्सबर्ग
31 अक्टूबर 2022 ✍️

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