Setu Awards सेतु सम्मान

Setu Awards for excellence for year 2018:
Individual winner: Santosh Bakaya 
Institutional winner: The Cultural Centre of Vijayawada and Amaravati (CCVA)
We also congratulate the winners in the Special Mention for their contribution to the field and thank  everybody for their participation.
1. Shelly Sethi
2. Rhythm Divine Poets
3. Karen O'Leary
4. Padmaja Iyengar 'Paddy'






Setu Awards for excellence for year 2017

Setu is honored in honoring these distinct signatures acting as a crucial Setu (bridge) between different nations and cultures through their unifying visions of humanism and liberalism in these toxic times. These are comforting voices. Setu awards for excellence, 2017 are being awarded to these four authors from across the globe for their uplifting works. The citations are being shared by the editorial board. Congratulations to these writers, who have always supported good cause, literary journalism, little press, and journals. We, indeed, are lucky and celebrating at Setu, the global community of artists, this great event.

Our commitment to serve the society and culture via Setu continues in humble way. You are welcome to be part of the caravan.

सन 2017 के लिये सेतु सम्मान निम्न गुणीजनों को प्रदान किया जा रहा है:
  1. श्री स्कॉट टॉमस ऑउटलार (संयुक्त राज्य अमेरिका)
  2. श्री रॉब हार्ले (ऑस्ट्रेलिया) 
  3. श्री अत्रेय शर्मा उप्पलूरी (भारत) 
  4. श्री से. रा. यात्री (भारत)
इस सम्मान के लिये स्वीकृति देने हेतु मैं इन चारों गुणीजनों का सेतु सम्पादन मण्डल की ओर से आभारी हूँ। चारों सम्माननीय विजेताओं को सेतु की ओर से हार्दिक बधाई।





Setu Awards 2016




Tabish Khair and Usha Kishore: Writers that have electrified us by their sheer energy and monumental presence. 

 Setu, USA, is honored in honoring these two distinct diasporic signatures acting as a crucial Setu (bridge) between different nations and cultures through their unifying visions of humanism and liberalism in these toxic times. These are comforting voices. Setu awards for excellence, 2016 are being awarded to both the artists. The citations are being shared by the editorial board. Congrats to the writers that have always supported good cause, literary journalism, little press and journals. We, indeed, are lucky and celebrating at Setu, the global community of artists, this great event. 


Next month, Setu awards for excellence in Hindi will be announced. 

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सेतु सम्मान 2016
किसी भी क्षेत्र में पुरस्कार या सम्मान की परम्परा का क्या मूल्य है यह लगभग हर व्यक्ति जानता-समझता है। दरअसल यह सम्मान किसी व्यक्ति को नहीं वरन उनके द्वारा उस क्षेत्र विशेष में दिए गए अवदान को दिया जाता है। और कई बार यह योगदान इतना महत्वपूर्ण होता है कि जब कोई व्यक्ति, पत्रिका या संस्था इस सम्मान से किसी को नवाज़ती है तो उस सम्मान को स्वीकारा जाना, प्रदान करने वाले का ही सम्मान होता है। 
मैत्रेयी पुष्पा 

हिन्दी साहित्य में उत्कृष्ट लेखन और विश्व भर में हिन्दी साहित्य व भाषा के प्रचार-प्रसार के चल रहे प्रयासों पर सेतु द्विभाषी साहित्यिक ई-पत्रिका लगातार नज़र रखे हुए है। इन्हीं दोनों बिंदुओं को ध्यान में रखकर सेतु द्वारा हिन्दी साहित्य में अविस्मरणीय योगदान के लिए वर्ष प्रथम सेतु साहित्य सम्मान सुप्रसिद्ध लेखिका मैत्रेयी पुष्पा जी को।

हिन्दी अकादमी, दिल्ली की उपाध्यक्ष मैत्रेयी पुष्पा से हिंदी पाठक भली-भांति परिचित हैं। वे वर्तमान हिंदी के शिरोमणि साहित्यकारों में से एक हैं। दिल्ली निवासी मैत्रेयी जी के लेखन में पाठक ब्रज और बुंदेली संस्कृतियों से परिचित हो सका है। दस उपन्यास, आठ कथा संग्रह सहित दो दर्जन से अधिक पुस्तकों की लेखिका मैत्रेयी जी ने अपनी लेखनी में ग्रामीण भारत को साकार किया है, उन्होंने भारतीय नारी के उस पक्ष को प्रस्तुत किया है जिसका चित्रण हिंदी साहित्य में सामान्य नहीं था। उनका कथन '1947 में भारत स्वतंत्र हुआ परंतु भारतीय नारी अभी भी स्वतंत्रता की प्रतीक्षा में है' उनके साहित्य के एक मुखर पक्ष की झलक दिखाता है। लेखक अपनी बात कहता है, परंतु पाठक अपनी ही बात समझते हैं। अच्छे लेखक अपनी अभिव्यक्ति को पाठक तक यथावत पहुँचाने में माहिर होते हैं। यथार्थ का बेबाकी से चित्रण करने वाली मैत्रेयी जी के लेखन की परिपक्वता उनके गहन अनुभव और गम्भीर अवलोकन का परिणाम है।

शैलेश भारतवासी 
हिन्दी साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए प्रथम सेतु हिन्दी प्रसारक सम्मान हिन्दी के लिए नई राह तैयार करने वाले शैलेश भारतवासी जी को प्रदान किया जा रहा है।

हिंदयुग्म की स्थापना के साथ शैलेश भारतवासी ने वर्तमान हिंदी को आधुनिक तकनीक के प्रवाह में बांधा था। हिंदयुग्म ने हज़ारों भारतीयों को यूनिकोड का प्रयोग करके कम्प्यूटर व मोबाइल उपकरणों पर सरल हिंदी लिखना सिखाया। हर मास एक यूनिकोड कवि सम्मान देकर संसार भर के उभरते कवियों को एक पहचान दी। हिंदी तकनीक के विशेषज्ञों, साहित्यकारों और वॉलंटीयर्स की सहायता से सुप्तप्राय हो रही हिंदी को हिला दिया। बाल उद्यान ने बाल साहित्य को, कहानीकलश ने गल्प को, आवाज़ ने दृश्य-श्रव्य को और हिंद युग्म ने साहित्य-शिल्प को बढावा और वैश्विक पहचान दिलाई। आवाज़ और हिंदयुग्म ने वैश्विक इंटरनैट कवि सम्मेलन सम्भव किये। हिंदयुग्म ने सबसे पहले प्रेमचंद की कहानियाँ और महादेवी, दिनकर, निराला, पंत, आदि जैसे महाकवियों की रचनाओं को वैश्विक प्रतियोगिताएँ कराकर संगीतबद्ध किया। वर्धा विश्वविद्यालय के वैबस्थल हिंदीसमय का बीज प्रेमचंद की प्रथम ऑडियोबुक सीडी के विमोचन पर ही पड़ा था।

निश्चित रूप से आप दोनों का इसे स्वीकार करना सेतु का ही सम्मान है। 

1 comment :

  1. Feel so honoured and humbled by this great recognition! Thank you Setu Team, reapected Dr Sunil Sharma, respected Rob Harle and respected Anurag Sharma ji! And my heartiest congratulations to CCVA, my dear friend Dr Santosh Bakaya, Rhythm Dibine Poets, Karen O'Leary and Shelly Sethi!

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