सोशल मीडिया का अतीत, वर्तमान और भविष्य

- पुनीत बिसारिया

हम अक्सर पाठ्यपुस्तकों में पढ़ते आए हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहकर ही वह अपने अस्तित्व को बचाकर रख पाता है किन्तु विगत कुछ समय में हमने अनुभव किया है कि सभ्यता के तथाकथित विकास के साथ पाश्चात्य अन्धानुकरण की लालसा में हमने स्वयं को शनैः-शनैः समाज से काट लिया है और हम व्यक्तिकेंद्रित, स्वार्थकेंद्रित, आत्मकेंद्रित समुदाय में परिवर्तित होते जा रहे हैं। तथाकथित आधुनिकता के पीछे भागते हुए हमने संबंधों, रिश्तों की उष्णता को नम हो जाने दिया है, जिसका परिणाम एकाकीपन, अवसाद, तनाव आदि मानसिक विकारों के रूप में आज हमारे सामने है। हमने गुजरे जमाने की मशहूर अभिनेत्री नलिनी जयवंत, अचला सचदेव, विमी, मीना कुमारी, परवीन बॉबी आदि को एकाकीपन के अवसाद में घुटते हुए दम तोड़ते देखा है। इसी तरह संगीतकार ओपी नैयर, पंजाबी अभिनेता सतीश कौल को भी सामाजिक तिरस्कार का शिकार होकर तिल-तिल मरते देखा है या फिर अभिनेता राज किरण को अमेरिका की गलियों में भटकते देखा-सुना है। रेमण्ड जैसी सफल कम्पनी के मालिक विजयपत सिंघानिया अपने बेटे गौतम सिंघानिया की उपेक्षा के कारण सड़क पर आ गए, यह कहानी भी ज़्यादा पुरानी नहीं हुई है। ये सब तो प्रायः सेलेब्रिटी थे और इनकी कहानियाँ छनकर देश-दुनिया के सामने आ गयीं किन्तु न जाने कितने ऐसे उच्च-मध्यम वर्गीय भारतीय परिवार हैं, जिनके बच्चे विदेश जाकर अपने माँ-बाप, परिवार को भूल चुके हैं और उनके माता-पिता एकाकी जीवन बिताकर कब दुनिया से कूच कर जाते हैं, इसका पता पड़ोसियों को भी कई दिनों के बाद लगता है। ऐसे में सोशल मीडिया एक वरदान की भांति हमारे सामने आया है। हमने देखा है कि ब्लॉगर अविनाश वाचस्पति अपने जीवन के अंतिम समय में सोशल मीडिया पर अपनी बात रखकर ही मानसिक शांति पाया करते थे।

यदि हम सोशल मीडिया के वर्तमान स्वरूप तक आने के इतिहास पर बात करें तो पाते हैं कि इसकी जड़ें अत्यंत प्राचीन हैं और संचार के माध्यम के रूप में इसका आदिम स्वरूप देखा जा सकता है। जिस दिन मनुष्य ने संकेतों अथवा भाषा के माध्यम से परस्पर संवाद का श्रीगणेश किया था, उसी दिन से संचार की शुरूआत हो गयी थी। देवर्षि नारद द्वारा तीनों लोकों में घूमकर संदेशों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना सभी को ज्ञात है। भारत में युद्ध भूमि में शंख बजाकर युद्ध प्रारंभ होने और सुबह एवं शाम को बंद होने का सन्देश प्रेषित किया जाता था। रंग के अनुसार ध्वज लहराकर युद्ध, शांति अथवा संधि का सन्देश देना या कबूतर उड़ाकर शांति की अपील करना आज भी प्रचलित है। कानाफूसी भी प्राचीनतम सन्देश संचार का स्रोत रही है। प्राचीन काल से प्रचलित चौपालें या पान अथवा चाय-कॉफ़ी की दुकानें सोशल मीडिया का प्राचीनतम रूप रही हैं, जहाँ बैठकर या खड़े होकर अब से लगभग 30 साल पहले तक लोग देश-दुनिया से रू-ब-रू हुआ करते थे और अपने-अपने दृष्टिकोण का आदान-प्रदान भी किया करते थे। सन्देश को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने के लिए भी इसके पुरातन रूप में सराय, धर्मशालाएँ आदि हुआ करती थीं, जहाँ राजा अथवा बादशाह के अश्वारोही संदेशवाहक परस्पर सूचनाओं को साझा किया करते थे, जिससे सूचना अपेक्षाकृत त्वरित गति से राज्य तक पहुँच जाया करती थी। चीन, यूनान और मिस्र की प्राचीनतम सभ्यताएँ ड्रम बजाकर अथवा धुएँ के माध्यम से सन्देश प्रेषित किया करती थीं। प्रस्तर पर उत्कीर्ण करना, चित्र बनाना, गीत-संगीत के माध्यम से सन्देश पहुँचाना, दूत भेजना, भोजपत्र पर लिखना, रेशम के वस्त्र पर सन्देश भेजना, किसी प्रतीक अथवा कूट भाषा के द्वारा सन्देश भेजना, दादी-नानी द्वारा कहानियाँ सुनाना आदि भी संचार के अंग हुआ करते थे। हनुमान और अंगद को दूत बनाकर रावण की सभा में भेजा गया था। डाकिया भी संदेशों के परस्पर विनिमय के संवाहक हुआ करते थे।

सन 1857 की भारतीय क्रांति का सन्देश देश भर में फैलाने के लिए रोटी और कमल का प्रतीक रूप में उपयोग किया गया था। समय बीतने के साथ वैज्ञानिक प्रगति होने से इसके स्वरूप में बदलाव आया और 24 मई सन 1844 ईस्वी को सैमुअल मोर्स द्वारा टेलीग्राफ के आविष्कार के बाद अश्वारोही आधारित सन्देश प्रेषण प्रणाली तथा इन सभी श्रम आधारित प्रणालियों  का स्थान धीरे-धीरे मशीनों ने लेना शुरू कर दिया। रेडियो और टीवी ने भी संदेशों को सफलतापूर्वक पहुँचाने का काम किया लेकिन ये वन वे प्लेटफार्म थे अर्थात इनसे सन्देश तो मिलता था लेकिन भेजना प्रायः संभव नहीं था। टेलीफोन, टेलीप्रिंटर और वायरलेस भी एक सीमित अर्थों में ही सन्देश का आदान-प्रदान करते थे और इनमें केवल ध्वनि ही एक दूसरे तक पहुँचती थी। 

सन 1960 में अमेरिका के इलिनोय विश्वविद्यालय ने प्लेटो PLATO (Programmed Logic for Automatic Operations) की शुरूआत की, जो दुनिया का पहला कम्पूटर सहायतित निर्देश सिस्टम था। दस साल के अन्दर ही इसने दुनिया भर में हजारों ग्राफिक सन्देश दुनिया के कम्प्यूटरों में भेजे।  यह सिस्टम सन 2006 तक जारी रहा और वर्तमान समय की अनेक सोशल मीडिया सेवाओं जैसे- ई मेल, चैट रूम, मैसेज बोर्ड, वीडियो गेम आदि का इसे जन्मदाता कहा जाना चाहिए।  प्लेटो ने सन 1973 में  टर्मटॉक, नोट्स और टॉकोमैटिक के माध्यम से क्रमशः त्वरित संदेश प्रेषण प्रणाली, ब्लॉग और पहला ऑनलाइन चैटरूम शुरू किये लेकिन ये सुविधाएँ केवल उनके मित्रों या सहकर्मियों तक ही सीमित हुआ करती थी। नवम्बर1994 में आई जियोसिटीज़ इण्टरनेट पर पहली सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट थी, जिसने परस्पर नेटवर्किंग को वास्तव में आम लोगों के लिए शुरू किया। इसके लगभग एक साल बाद दिसंबर 1995 में क्लासमेट और मई 1997 में सिक्स डिग्रीज़ सोशल नेटवर्किंग साइट आए। यहाँ सिक्स डिग्रीज़ का उल्लेख किया जाना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि वास्तव में यही पहली वास्तविक सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट थी क्योंकि इसने पहली बार प्रयोक्ताओं को प्रोफाइल, मित्र सूची और स्कूल के विवरण जोड़ने के विकल्प दिए। अक्तूबर 1998 में ओपन डायरी, मार्च 1999 में लाइव जर्नल, जुलाई 1999 में पिटाज़ डॉट कॉम, अगस्त 1999 में ब्लॉगर डॉट कॉम, अक्तूबर 2001 में राइज़, मार्च 2002 में फ्रेण्डस्टार, मई 2003 में लिंक्डइन, जून 2003 में हाई 5, अगस्त 2003 में माय स्पेस और स्काइप, जनवरी 2004 में ऑरकुट, फरवरी 2004 में फेसबुक, नवम्बर 2004 में गूगल स्कॉलर, मार्च 2005 में याहू 360डिग्री, जुलाई 2005 में बेबो, मार्च 2006 में रूसी एप ओडनोंक्लासिंकी, जुलाई 2006 में ट्विटर, अक्तूबर 2006 में रूसी एप वीके, फरवरी 2007 में टंबलर, जनवरी 2009 में व्हाट्सएप, जनवरी 2010 में पिंटरेस्ट, अक्तूबर 2010 में इन्स्टाग्राम एवं किक मैसेंजर, जनवरी 2011 में वीचैट, जुलाई 2011 में गूगल प्लस और स्नैप चैट, अगस्त 2011 में फेसबुक मैसेंजर, सितम्बर 2011 में ट्रेल्लो, दिसम्बर 2012 में भारतीय प्लेटफार्म हाइक, फरवरी 2014 में यूट्यूब, जनवरी 2015 में बफ़र, मई 2015 में गेम आधारित डिस्कोर्ड, सितम्बर 2015 में गूगल हैंगआउट, सितम्बर 2016 में टिकटॉक के सोशल मीडिया प्लेटफार्म शुरू हुए। इनके अतिरिक्त क्यूक्यू, क्यूजोन, बैदू तिएबा, वाइबर, साइना वीबो,  लाइन, वायवाय, टेलीग्राम, रेडिट, तरिंगा, फोरस्क्वायर,रेनरेन, टैग्ड, बडू, स्टम्ब्लर, द डॉट्स, किवीबॉक्स, स्काईरॉक, डिलीशियस, स्नेपफिश, रिवर्बनेशन, फ्लिक्सटर, केयर 2, कैफ़ेमॉम, रैवेलरी, नेक्स्टडोर, वेन, सेल्यूफन, वाइन, क्लासमेट्स, मायहेरिटेज, वायाडियो, जिंग, क्संगा, लाइवजर्नल, फनी ऑर डाई, गाइया ऑनलाइन, वी हार्ट इट, बज़नेट, डेवियन आर्ट, फ्लिकर, मीटमी, मीटअप, टाउट, मिक्सी, डाउबन, वेरो, कुओरा, स्प्रीली और डिस्कोर्ड आदि भी विश्व के लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफार्म हैं। नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार, टिकटॉक, हेलो आदि नए प्लेटफार्मों ने मनोरंजन को नए सिरे से परिभाषित किया है। इनके अलावा जस्ट डायल, अमेज़न, फ्लिपकार्ट, ओला और उबेर, ओयो, फार्मइजी, अर्बन लैडर, स्विग्गी, ज़ोमैटो तथा रोज़ आ रहे नए एप ने मनोरंजन के अतिरिक्त अन्य अनेक क्षेत्रों में भी अपनी प्रासंगिकता सिद्ध की है। दुनिया के सभी महत्त्वपूर्ण राजनेता, अभिनेता एवं आम लोग भी अब सोशल मीडिया विशेषकर ट्विटर, फेसबुक या ब्लॉगिंग के माध्यम से अपनी बात दुनिया भर में पहुँचा रहे हैं। अब तो भारत सरकार का भीम और नमो एप भी क्रमशः ऑनलाइन भुगतान तथा सरकार की नीतियों को आम लोगों तक सफलतापूर्वक पहुँचाने का जरिया बन चुके हैं। 

वैसे तो इन सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों ने समय-समय पर अपनी अहमियत साबित की है लेकिन ब्लॉगिंग के क्षेत्र में ब्लॉगर डॉट कॉम और वर्डप्रेस ने सर्वाधिक लोकप्रियता प्राप्त की है।  आइओएस और एंड्राइड के आने के बाद इनमें आशातीत वृद्धि हुई है।  

सोशल मीडिया को आधुनिक युग के लोगों की जरूरत से अधिक एक दूसरे से जुड़ने का माध्यम और अकेलेपन का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण साथी भी माना जा सकता है, जो व्यक्ति के जीवन के हर क्षेत्र में अपनी उपयोगिता साबित कर रहा है। सोशल मीडिया मुख्यतः जिन आयामों से मिलकर बनता है, उनमें प्रोफाइल में व्यक्तिगत विवरण, मित्र या अनुयायी की सूची, समाचार या/और सन्देश प्राप्त करना और भेजना, किसी के सन्देश को लिखित अथवा चित्रित रूप में पसंद करना और प्रतिक्रिया देना सम्बन्धी बटन, समीक्षा, वोटिंग, सर्वेक्षण, चित्र, एनिमेशन, इमोजी और विडियो, ऑनलाइन लिखित, ऑडियो अथवा वीडियो चैट, स्लाइड शो, गेमिंग, व्यापार, लेन-देन, खोया-पाया, व्यक्तिगत या सामाजिक पृष्ठ अथवा समूह बनाना, किसी लिंक को शेयर करना, किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म से जुड़ना आदि अनेक सुविधाओं को परिगणित किया जा सकता है। 

सोशल मीडिया की कुछ समस्याएँ भी हैं, जिनसे निजात पाने की आवश्यकता है। जैसे- सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ या अफवाहों का उड़ना, जिनसे देश, समाज और विश्व की शांति को भंग करने का कुत्सित प्रयास करना, स्पैम या नुकसानदेह मेल का आना, साइबरचोरों का हमारे निवास के स्थान की रेकी कर अपराधों को अंजाम देना, ट्रोल या खिंचाई कर किसी के जीवन को दुखदायी बनाना, निजता का हनन, चित्र या वीडियो में हेराफेरी कर किसी के व्यक्तित्व पर आघात पहुँचाना, कंप्यूटर या मोबाइल को वायरस भेजकर संक्रमित करना या किसी महत्त्वपूर्ण फाइल या डाटा की चोरी करना अथवा उसे विकृत करना जैसे दुष्कृत्य शामिल हैं। 

ये तो रही सोशल मीडिया के अतीत और वर्तमान की बात, आइये अब विचार करते हैं कि सोशल मीडिया का भविष्य कैसा होगा। इस पर बात करना अत्यंत रोचक हो सकता है क्योंकि सोशल मीडिया नित नए चोले धारण कर हमारे सामने उपस्थित हो रहा है। 5जी, 6जी और इसके आगे की पीढ़ियों के डाटा के आने के बाद यह और भी तेज़ तथा प्रभावशाली तो होगा ही, इसके स्वरूप में भी क्रान्तिकारी बदलाव आएँगे। आने वाले समय में हम और अधिक इण्टरएक्टिव हो सकेंगे तथा ये संपर्क द्विविमीय से त्रिविमीय भी हो सकते हैं, जिसकी एक झलक भारत के 2014 के आम चुनावों में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की आभासी उपस्थिति से संपन्न रैलियों एवं जनसभाओं में हमने देखी थी। इसका सस्ता और सरल विकल्प शीघ्र ही आम जनता की जेब तक भविष्य के मोबाइलों के माध्यम से उपलब्ध होगा। इसके अतिरिक्त इण्टरनेट की स्पीड तेज़ होने से के डाटा अपलोड और डाउनलोड में तेज़ी आएगी और दुनिया और भी तीव्र गति से एक दूसरे से जुड़ सकेगी। इससे वीडियोस्ट्रीमिंग आसान होगी और मनोरंजन या सोशल नेटवर्किंग में व्यवधान कम अथवा नगण्य होगा। संभव है कि इससे भविष्य का मनुष्य भी एक चलते-फिरते रोबोट में तब्दील हो जाए और अँगुलियों के स्पर्श मात्र से ही नहीं वरन सोचने भर से उसके मन का कार्य पूर्ण होने लगे। दुनिया जितनी छोटी होगी, उतनी ही वसुधैव कुटुम्बकम की सनातन अवधारणा से जुड़कर यह मानव सभ्यता के लिए कल्याणकारी बनेगी।  भविष्य में सोशल मीडिया की कृत्रिम बुद्धिमत्ता में वृद्धि होगी। एलेक्सा और गूगल होम ने घर में अलादीन के चिराग का जिन्न बैठा दिया है, जो आपका हर हुक्म बजाने को तैयार है। भविष्य में एलेक्सा और गूगल होम का भी दायरा बढ़ेगा और ये अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से जुड़कर जीवन को और अधिक सुविधाजनक बनाने का काम करेंगे।  

*डॉ. पुनीत बिसारिया, सह आचार्य-हिन्दी विभाग, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी, उत्तर प्रदेश 284128 

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