सर्वागीण विकास में नई शिक्षा नीति की भूमिका

महेश टेलर
संविदा शिक्षक केंद्रीय विद्यालय नसीराबाद (अजमेर) 
ईमेल: maheshtailor58@gmail.com
चलभाष: +91 876 438 2148


महेश टेलर
शोध सारांश - 
           उपलब्ध संसाधनों से अप्राप्त को प्राप्त करना, प्राप्त को संवर्द्धित करना और उसे जीवनोपयोगी बनाने का मूलमंत्र ही बालकों को आसानी से मुख्यधारा में ला सकता है। मगर यह भी जरूरी है कि अध्यापक धैर्य की कसौटी पर खरा उतरें ओर लगातार प्रयत्नशील रहे। निश्चित ही एक समय की यात्रा करने के दौरान अविश्वसनीय परिणाम नजर आएंगे।


बीज शब्द –  
NEP 2020 (NEW EDUCATION POLICY 2020), NIPUN (National Initiative for Proficiency in Reading with Understanding and Numeracy) FLN (Foundational Literacy and Numeracy)          

            
       किसी भी कार्य मे सफलता अर्जित करने के लिए किसी न किसी नीति का होना आवश्यक है। नीति को विभिन्न चरणों मे सुनिश्चित रूप में लागू करना अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान समय की  नीतियाँ विगत नीतियों की कमियों को भी पूर्ण करती है। वर्तमान की शिक्षा नीति भी ऐसा ही प्रतिबिंब हमारे सामने प्रस्तुत करती है। NEP – 2020 बच्चों के सर्वांगीण विकास में किस प्रकार से योगदान दे रही है इसे हम निम्न बिंदुओं के माध्यम से समझ सकते है। यथा - 


1 बौद्धिक विकास –  
         नई शिक्षा नीति 2020 पूर्व की शिक्षा नीति की बजाए अत्यंत व्यापक, लचीली और संकल्पबद्ध है। संपूर्ण शैक्षणिक कालक्रम को चार भागों में विभाजित किया है। 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए आँगनवाड़ी/ बालवाटिका / प्रीस्कूल के माध्यम से मुफ्त, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उपलब्धता करवाना रहा है। वहीं 6 वर्ष से 8 वर्ष तक के बच्चों को प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा-1 और 2 में शिक्षा प्रदान की जाएगी।

सौजन्य: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, पेज संख्या 8
फाउंडेशनल स्तर – (आंगनवाड़ी/ पूर्व – विद्यालय/ बालवाटिका) व कक्षा 1 और 2 के लिए, आयु 3 से 8 तक के लिए।
प्रारंभिक स्तर – कक्षा 3 से 5, आयु वर्ग 8 से 11 तक
मध्य स्तर – कक्षा 6 से 8 तक, आयु वर्ग 11 से 14 तक
माध्यमिक स्तर – कक्षा 9 से 12 तक, आयु वर्ग 14 से 18 तक रखा गया है। उसके बाद कॉलेज / विश्वविद्यालय शिक्षा का उल्लेख है।


2. शारीरिक विकास – 

          प्रारंभिक शिक्षा को बहुस्तरीय खेल और गतिविधि आधारित बनाने को प्राथमिकता दी जाएगी। जिसका सुचारू रूप से क्रियान्वयन किया भी जाने लगा है। NEP में प्रारंभिक बाल्यावस्था के बारे में उल्लेख किया गया है कि “ईसीसीई  का  समग्र  उद्देश्य  बच्चों  का शारीरिक – भौतिक विकास, संज्ञानात्मक विकास, समाज-संवेगात्मक-नैतिक विकास,  सांस्कृतिक विकास, संवाद के लिए प्रारंभिक भाषा, साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान के विकास में अधिकतम परिणामों को प्राप्त करना  है।“2 विभिन्न विद्यालयों में FLN (Foundational Literacy and Numeracy) को लागू कर दिया गया है जो की NEP के अंतर्गत है। विद्यालयों के द्वारा वर्ष 2025 तक प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा-3 तक के सभी विद्यार्थियों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान प्राप्त करने हेतु इस मिशन के क्रियान्वयन की योजना को लागू कर दिया गया है।

      दैनिक व्यवहार में गुणवत्तापूर्ण कौशलों की बढ़ोत्तरी के लिए विद्यालय स्तर पर विभिन्न उदाहरणों को प्रस्तुत करके पढ़ाया जा रहा है।

एनईपी-2020 में शिक्षा मंत्रालय द्वारा ‘बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान पर एक राष्ट्रीय मिशन’ (National Mission on Foundational Literacy and Numeracy) विकास पर बल दिया गया है।

3 भाषिक विकास – 
      NEP में बहुभाषी संस्कृति को ध्यान में रखते हुए व भविष्य उन्मुख, लचीली भाषाई नीति को लागू की है। NEP में वर्णित है कि “सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकीकरण की दृष्टि से सभी युवा भारतीयों को अपने देश की भाषाओं के विशाल और समृद्ध भण्डार और इनके साहित्य के खज़ाने के बारे में जागरूक होना चाहिए।“3 

 

 नई शिक्षा नीति में ‘त्रिभाषा सूत्र’ को अपनाया है। जिसमें क्षेत्रीय भाषा का भी महत्व बना रहेगा और उसका भी विकास होगा। जब तक बच्चें अपनी क्षेत्रीय भाषा से जुड़ा नहीं रहता तब तक उसकी पूर्ण रूप से भावात्मक अभिव्यक्ति नहीं होती अतः विभिन्न विद्यालयों में ‘भाषा संगम’ के कार्यक्रम आयोजित हो रहे है। एक भारत श्रेष्ठ भारत मिशन के तहत अलग-अलग प्रोजेक्ट चलाये जा रहे है। ‘कला एकीकृत प्रोजेक्ट’ भी उसी का हिस्सा है जिसमें विद्यार्थी अपनी कला संस्कृति के साथ-साथ अन्य राज्यों की कला और संस्कृति को भी समझ सके। इस प्रकार के विविधता पूर्ण माहौल से बच्चों को अन्य भाषाओं, क्षेत्रों के प्रति रुचि व लगाव उत्पन्न होगा

4. नैतिक मूल्यों का विकास – 
        पाठ्यक्रम में निहित अध्यायों से एक ओर जहाँ कोर्स पूरा होता है। वही दूसरी ओर विद्यालय स्तर विभिन्न जयन्तियों, समारोह का आयोजन किया जाता है जिससे बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास भी होता है। वे महापुरुषों के व्यक्तित्व, कृतित्व और जीवन संघर्षों को जान पाते है। ओर अपने जीवन को अधिक खुशहाल, सम्पन्न बनाने का प्रयास करते है।

“कोई चलता पद चिन्ह कोई पद चिन्ह बनाता है।
है वहीं सूरमा इस जग में पूजा जाता है।”4

5. आध्यात्मिक विकास -
“बहा दो ज्ञान की गंगा दिलों में प्रेम का सागर
हमें आपस में मिल जुलकर प्रभु रहना सीखा देना
हमारा कर्म हो सेवा, हमारा धर्म हो सेवा
दया कर दान विद्या का हमें परमात्मा देना”5

  विभिन्न विद्यालयों में विविध प्रार्थनाओं से विद्यालय की दैनिक गतिविधियों का प्रारंभ होता है। जिससे कि विद्यार्थियों में अनुशासन में भी सीखते है वहीं दूसरी ओर आध्यात्मिक का विकास होता है। जो कि एक पंथ का न होकर मानवीयता के धर्मों, मूल्यों को प्रोत्साहित करता है। CCA कक्षाओं के दौरान भी बच्चों को विभिन्न कलाओं, कौशलों का सही दिशा में विकास हेतु उचित माहौल मिलता है।

6. एकता व सद्भाव का विकास –
“संसार की समरस्थली पर धीरता धारण करो
चलते हुए निज इष्ट पथ संकटों से तुम न डरो।“6


बच्चों में राष्ट्रीयता की भावना को बलवती करने के लिए प्रारंभिक स्तर पर कब/ बुलबुल, स्काउट/ गाइड, रोवर्स/ रेंजर्स के दलों का निर्माण किया जाता है। जिससे बच्चों में अनुशासन, एकता व सद्भाव के साथ दिए गए टास्क को पूर्ण करने व मातृभूमि के प्रति कर्तव्यनिष्ठा, वफादारी का भाव जागृत होता है।

    शिक्षण संस्थानों में अपना श्रेष्ठतम प्रदर्शन, साहसिक कार्यों में उत्कृष्टता व अद्भुत अदम्य कार्य करने वाले विद्यार्थियों को माननीय राष्ट्रपति द्वारा भी सम्मानित किया जाता रहा है। 

7. बुनियादी ढाँचे का विकास –
     कोई भी मंजिल/ इमारत हो या फिर कर्मपथ पर लक्ष्य यदि उसकी नींव अच्छे से रखी गई हो तो इमारत स्वतः ही मजबूत बन जाती है। किसी भी देश की समृद्धि, खुशहाली उसके उस देश की युवा शक्ति की कर्मठता पर निर्भर करती है। आज के बच्चे आने वाले कल के भविष्य के निर्माता होंगे अतः यह जरूरी हो जाता है कि आने वाले भविष्य की भी नींव मजबूत की जाएँ।
 
शिक्षक प्रशिक्षण –  NEP 2020 में शिक्षक प्रशिक्षण का भी उल्लेख है। उस अनुरूप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से शिक्षा दी जा रही है। जिससे शिक्षक बन्धुओं को एक प्लेटफार्म मिल जाता है। जिससे वे अपनी शिक्षण विधियों में यथोचित परिवर्तन कर देशकाल परिस्थितियों के अनुकूल बच्चों को श्रेष्ठ नागरिक बना सके। 

उपलब्ध संसाधनों से अप्राप्त को प्राप्त करना, प्राप्त को संवर्धित करना और उसे जीवनोपयोगी बनाने के मूल मंत्र से पिछड़े बालकों को भी आसानी से मुख्यधारा में लाया जा सकता है। मगर यह भी जरूरी है कि अध्यापक धैर्य की कसौटी पर खरा उतरें ओर लगातार प्रयत्नशील रहे। निश्चित ही एक समय की यात्रा करने के दौरान अविश्वसनीय परिणाम नजर आते है। जहाँ चाह है वहाँ रहा है। कर्मशील व्यक्ति असंभव को संभव में तब्दील कर देता है। अध्यापन कौशल व अभिप्रेरणा के लिए विविध संसाधन है जिसके माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा सकता है। वर्तमान समय मे ‘निष्ठा’ व दीक्षा एप्प के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा रहा है। 

   प्राचार्य व मुख्याध्यापक महोदयों के द्वारा अभिभावक मीटिंग और स्टॉफ मीटिंग हर माह आयोजित की जाती है। जिससे बच्चों व विद्यालय की उन्नति के लिए विभिन्न योजनाओं की समीक्षा व विश्लेषण किया जाता है और भावी योजनाओं, एक्शन रिसर्च पर व्यवहारिक स्तर पर चर्चाएँ की जाती है।
सम्रगतः कहा जा सकता है कि NEP भविष्यन्मुख नीतियों का ड्राफ्ट है। जहाँ एक ओर गौरवशाली इतिहास का भी ह्रास नहीं हुआ और तकनीकी युग मे भी पीछे नहीं रहता। भविष्य के लिए सुयोग्य नागरिक के गठन में भूमिका निभा रहा है। जिसके गर्भ में वसुदेव कुटुंबकम का संदेश भी निहित है। बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए शिक्षक प्रशिक्षण भी अतिमहत्वपूर्ण विषय हैं।

संदर्भ ग्रन्थ सूची – 
1. शिक्षा मंत्रालय, चित्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति, पेज संख्या 8
2. शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रीय शिक्षा नीति,  पेज संख्या 9
3. शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रीय शिक्षा नीति,  पेज संख्या 21
4. रामधारी सिंह दिनकर https://www.hindisoch.com/kamyabi-ka-raaz/


3 comments :

  1. सुंदर, बहुत ही अच्छे तरीके से विद्यार्थी व नई शिक्षा नीति 2020 पर प्रकाश डालने के लिए - धन्यवाद, क्योंकि विद्यार्थी रूप में बालकों के सर्वांगीण विकास के लिए नई शिक्षा नीति 2020, भारत के भावी पीढ़ियों को एक नए आयाम को छूने का अवसर प्रदान करने के अपने संकल्प के साथ बालक को नई ऊर्जा से परिपूर्ण करती हुए अपने सभी उद्देश्यों को पूरा करेगी। जिसमें अभिभावक, अध्यापक और परिवेश अपने कर्तव्य का पालन करेंगे।

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    1. विचारों के लिए धन्यवाद सर जी,
      नये आयाम, नवीन संकल्प से कार्यों में परिपूर्णता ला सकते है।

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    2. विचारों के लिए धन्यवाद सर जी,
      नये आयाम, नवीन संकल्प से कार्यों में परिपूर्णता ला सकते है।

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