सम्पादकीय - अनुराग शर्मा

नमस्कार,

भारतीय गणतंत्र दिवस पर आप सभी को हार्दिक मंगलकामनाएँ! हमारे गणतंत्र का सपना सच करने में अनेक वीरों का जीवन गया है। स्वतंत्रता संग्राम में हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी के सेनानियों की भूमिका अति-महत्त्वपूर्ण रही है। इनमें से अधिकांश पढ़ने-लिखने में रुचि रखते थे और उनके जीवन का एक पहलू साहित्य-सृजन, अनुवाद, पत्रकारिता आदि से भी जुड़ा था। अशफ़ाक़ उल्ला खाँ, पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, और चंद्रशेखर आज़ाद, ये तीनों कवि थे। सेतु के इस अंक में आज़ाद की एक काव्य रचना ली गयी है। राष्ट्रीय स्मिता का संघर्ष देश की आज़ादी की घोषणा के बाद भी चलता रहा। स्कर्दू दुर्ग की घेराबंदी, सेतु की नियमित लेखिका शशि पाधा के लिये एक व्यक्तिगत घटना थी। इस अंक में उनसे सुनते हैं, उनके मामा द्वारा स्कर्दू किले की कहानी।
 
जनवरी मास में संसार भर में विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। इस बार भी इस विषय पर विभिन्न चर्चाओं द्वारा हिन्दी की वर्तमान स्थिति, और उसके विश्वभाषा बनने की दिशा में खड़ी बाधाओं पर गम्भीर वार्ताएँ हुई हैं। आज संसार की अनेक भाषाओं पर विलुप्ति का संकट मंडरा रहा है। भाषा-विलुप्ति का अध्ययन करने वाले जानते हैं कि सबसे सरल, और सीमित क्षमता वाली भाषाएँ सबसे पहले काल के गाल में समाती हैं। संस्कृत के व्याकरण को जटिलतम मानने वाले, उसे मृतभाषा बताने वाले भी इस बात को नकार नहीं सकते कि संस्कृत आज भी भारत और उसके बाहर प्रतिदिन समस्त पृथ्वी पर न केवल सुनी और सुनायी जाती है, बल्कि आज भी उसमें पत्र-पत्रिकाएँ निकलती हैं। उसका प्राचीन साहित्य आज भी विश्व को आकर्षित करता है और अध्ययन का विषय है। हज़ारों वर्षों के आघात भी उस सशक्त भाषा को नष्ट नहीं कर सके। हिंदी के सरलीकरण की बात करने वालों को यह बात ध्यान रखनी चाहिये कि सरलीकृत भाषा एक कमज़ोर भाषा होती है, और प्राकृतिक रूप से अपने से अधिक सक्षम भाषा से पहले नष्ट होती है। बिना लिपि की भाषा, लिखित भाषा से पहले जाती है। और फिर भाषा की सरलता है क्या? जो हमें पता है वह सरल है, जो हम पता नहीं करना चाहते वह जटिल है। मनुष्य एक जटिल प्राणी है। मानवीय सभ्यता एक जटिल प्रक्रिया है। हमारा हर दैनंदिन कृत्य अन्य प्राणियों की तुलना में जटिल है और इस जटिल सभ्यता में संवाद के लिये वे ही भाषाएँ उपयुक्त हैं जिनमें जटिल विषयों को सरलता से अभिव्यक्त किया जा सके, यह समझना हम हिंदीभाषियों के लिये बहुत महत्त्वपूर्ण है। 

बाल साहित्य के एक प्रमुख हस्ताक्षर जयप्रकाश भारती के जन्मदिवस के अवसर पर इस अंक में उन्हें याद कर रहे हैं प्रसिद्ध साहित्यकार प्रकाश मनु जी।

इस माह में हमने उपन्यासकार, प्रकाशक, और हिंदी लघुकथा के एक स्तम्भ मधुदीप को खो दिया है। सेतु परिवार की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धाञ्जलि!

शुभाकांक्षी,
सेतु, पिट्सबर्ग
31 जनवरी 2022 ✍️

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