बधाई: साहित्य के अंतरराष्ट्रीय सेतु के छह वर्ष पूर्ण

अनुराग शर्मा
नमस्कार,

मेरा यह महीना भारत-यात्रा में व्यतीत हुआ। कदम-कदम पर घोर अव्यवस्था दिखने के बावजूद भारतीयता में रचे-बसे प्रेम और आतिथ्य ने सदा की तरह मन मोह लिया और वापस आने के बाद अभी तक भारत का वात्सल्य मन को आद्र किये हुए है। अनेक परिजनों तथा पुराने मित्रों से मिलना हुआ। पारिवारिक व्यस्तता के कारण अपनी भारत-यात्राओं में मैं अब तक किन्हीं साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय नहीं रहा हूँ तो भी इस बार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में साहित्य सम्बंधी कुछ त्वरित भेंटें अवश्य हुईं। साहित्य अकादमी के विद्या-विनय सम्पन्न कुमार अनुपम जी से पहली मुलाक़ात में ऐसा लगा ही नहीं जैसे हम पहली बार मिले हैं। हिंदी निदेशालय के दीपक पाण्डेय जी ने हाल ही में दो खण्डों में छपा "प्रवासी साहित्य: विश्व के हिंदी साहित्यकारों से संवाद" भेंट किया। इसके पहले खण्ड में मेरा भी एक साक्षात्कार सम्मिलित करने के लिये उनका और उनकी जीवन-साथी विदुषी नूतन पाण्डेय जी का हृदय से आभार।    

हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार प्रकाश मनु जी से उनके फ़रीदाबाद निवास पर भेंट हुई। 12 मई को उनका जन्मदिन होता है, मंगलकामनाएँ। इसी उपलक्ष्य में इस अंक में पिंकी बिड़ला के साथ उनका एक साक्षात्कार प्रस्तुत है। सेतु के धरोहर स्तम्भ के लिये प्रकाश मनु जी ने देवेंद्र सत्यार्थी जी की हृदयस्पर्शी कहानी 'इकन्नी' भिजवायी है, जिसके लिये सम्पादन मण्डल उनका और सत्यार्थी जी की बेटी अलका जी का आभारी है। ज्ञातव्य है कि सत्यार्थी जी पर प्रकाश मनु जी की पुस्तक साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित हो चुकी है। 28 मई को सत्यार्थी जी का जन्मदिन होता है, इस अवसर पर उनकी याद स्वाभाविक है।

हमारे स्तम्भकार, कनाडा से धर्मपाल महेंद्र जैन जी तथा भारत से कन्हैया त्रिपाठी जी का सातत्य आप सेतु में देखते रहे हैं। मैं उनका भी आभार व्यक्त करना चाहता हूँ।

सेतु में प्रकाशित होने वाली लघुकथाओं का स्तर बनाये रखने के लिये हमारे लघुकथा सम्पादक श्री राजेश उत्साही का आभार।

सेतु की सफलता के छह वर्ष पूर्ण होने में जो एक व्यक्ति सर्वाधिक श्रेय का भागी है, वह हैं मेरे बड़े भाई, साहित्यकार और सेतु के अंग्रेज़ी संस्करण के प्रबंध सम्पादक डॉ सुनील शर्मा - हार्दिक धन्यवाद, और बधाई। 

... और सबसे अधिक आभार हमारे लेखकों और पाठकों का, जिनका सहयोग इस पत्रिका का संचालन सुनिश्चित करता रहा है।

गीतांजलि श्री की 'रेत समाधि' के अंग्रेज़ी अनुवाद टूम ऑफ़ सैंड (अनुवादक: डेज़ी रॉकवाल) को इंटरनेशनल बुकर सम्मान मिला है। सभी हिंदी साहित्य प्रेमियों को बधाई!

यह सम्पादकीय सामने आने से कुछ क्षण पहले ही कलकत्ता में एक प्रस्तुति के बाद प्रसिद्ध गायक केके की अकालमृत्यु की दुःखद खबर सामने आयी है। सेतु परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धाञ्जलि!

शुभाकांक्षी,
सेतु, पिट्सबर्ग
31 मई 2022 ✍️

1 comment :

  1. प्रिय भाई अनुराग जी,
    आप से भेंट होने पर आपके सरल, निश्छल मन और कर्मठता की हृदय पर जो छाप पड़ी, वही आपके इस संपादकीय में भी नजर आई, जिसमें आपका भारत प्रेम ही नहीं, भीतरी स्नेह और अऩुराग भी बह रहा है। सच कहूँ तो आपसे मिलना मेरे जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव था। 'सेतु' के जरिए काफी समय से आपको देखता, परखता और बड़ी हार्दिकता से प्रेम भी करता रहा हूँ। पर मिलकर उस भीतरी सोते औऱ अंतःसलिला को भी जाना, जो आपकी प्राणशक्ति है, और 'सेतु' सरीखी विश्वस्तरीय पत्रिका की प्रेरणा भी। मैंने अपना पूरा जीवन साहित्य और पत्रकारिता में लगाया है और जानता हूँ कि कोई अच्छी साहित्यिक पत्रिका निकालना कितने श्रम, लगन और तपस्या की माँग करता है। इसीलिए 'सेतु' के हर पन्ने पर मुझे कहीं न कहीं आपकी उपस्थिति नजर आ जाती है।

    महान लोकसाधक और कथाशिल्पी देवेंद्र सत्यार्थी जी की यादगार कहानी 'इकन्नी' आपने इस बार 'धऱोहर' के रूप में दी। इसके लिए आपका बहुत-बहुत आभार। यह कहानी सत्यार्थी जी की दुख-दारिद्र्य और तकलीफों भरी यात्राओं की एक मर्मकथा सरीखी है। लोकगीतों की तलाश में सत्यार्थी जी ने पूरे देश की अनवरत यात्राएँ कीं, पर इसके लिए कितना कुछ उन्हें सहना पड़ा, कहानी बहुत थोड़े लफ्जों में यह कह देती है। 'सेतु' के जरिए अब यह देश-दुनिया के साहित्यिकों और सुधी पाठकों तक पहुँचेगी। इसके लिए भाई अनुराग जी, आपको और 'सेतु' को साधुवाद।

    बाल नाटकों पर इस अंक में मेरा साक्षात्कार भी आपने बहुत करीने से छापा है, और उस पर अभी से बड़े सुखद संदेश मिलने शुरू हो गए हैं। इसे भी मैं 'सेतु' की अपार लोकप्रियता का ही एक प्रमाण मानता हूँ।

    मेरा बहुत-बहुत स्नेह और शुभकामनाएँ,
    प्रकाश मनु

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