एक और एक ग्यारह - सम्पादकीय

अनुराग शर्मा
सेतु के प्रबुद्ध पाठकों को नमस्कार!

आप सभी रचनाकारों तथा पाठकों के सहयोग से सेतु निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है। पिछला महीना सेतु के लिये अविस्मरणीय रहा है। पहली घटना तो सेतु की प्रथम काव्य प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा थी। सभी विजेताओं को सेतु परिवार की ओर से हार्दिक बधाई।सम्पादन मण्डल द्वारा प्रतियोगिताओं के विजेताओं से अलग से सम्वाद किया जा रहा है। इस संदेश के माध्यम से भी मैं उनसे अनुरोध करता हूँ कि वे अपना सम्पर्क सूत्र हमें ईमेल से भेज दें ताकि उनके पुरस्कार सही हाथों में सौंपे जा सकें।

लखनऊ में प्रथम सेतु सम्मान समारोह का आयोजन इस माह की दूसरी उल्लेखनीय घटना रही। ज्ञातव्य है कि सेतु द्वारा अब तक भाषा और साहित्य के क्षेत्र में चार विशिष्ट सम्मान प्रदान किये जा चुके हैं। अंग्रेज़ी में उषा किशोर तथा तबिश खैर के चुनाव के बाद हिंदी के क्षेत्र में प्रसिद्ध साहित्यकार  मैत्रेयी पुष्पा तथा प्रकाशक शैलेश भारतवासी को क्रमशः हिंदी साहित्य तथा हिंदी प्रसार के लिये सेतु सम्मान प्रदान किये गये थे।

पुरस्कृत महानुभावों की स्वीकृति प्राप्ति के बाद, सम्मान समारोह को भारत में किये जाने की मैत्रेयी जी की इच्छा का आदर करते हुए, 17 मई 2017 को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ में आयोजित समारोह में मैत्रेयी जी तथा शैलेश जी को सम्मानित किया गया। सेतु सम्पादन मण्डल की ओर से सभी सम्मनितों को बधाई, और अतिथियों तथा शुभाकांक्षियों का आभार। अमेरिका में होते हुए भारत में अतिथियों की उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए, आयोजन के कार्यक्रम का स्थल और तिथि तय करना थोड़ा जटिल था। इस कारण से आयोजन की तिथि व स्थल की घोषणा में हमारी ओर से कुछ देरी अवश्य हुई, जिसके लिये मैं क्षमाप्रार्थी भी हूँ और भविष्य के आयोजनों में ऐसी पुनरावृत्ति न होने देने के प्रति आशावान भी।

प्रथम वार्षिक पड़ाव के इस अंक के साथ सेतु के हिंदी व अंग्रेज़ी लेखकों की संख्या 300 हो गई है। ग्यारह महीने में सेतु ने 139,501 हिट्स को पार किया है। मई 2017 के इस अंक के साथ सेतु पर कुल प्रकाशित आलेखों की संख्या अब पूरे 1,000 है।


जैसा कि आपको पता है, सेतु पुस्तक प्रकाशन के क्षेत्र में प्रवेश कर रही है। इस समय हम कुछ उत्कृष्ट पुस्तकों पर कार्यरत हैं। यदि आप कुछ अलग सा लिखते हैं और उसे प्रकाश में लाना चाहते हैं तो अवश्य सम्पर्क कीजिये। पुस्तक लिखें या न लिखें, हमारे आगामी वार्षिकांक में आपकी उत्कृष्ट, मौलिक व अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। 


प्रकाशन के उद्देश्य से सेतु को भेजी गई रचनाओं की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इनमें से कई रचनाएँ पूर्वप्रकाशित होने, या यूनिकोड में न होने के कारण हम उन्हें प्रयोग करने में असमर्थ हैं। कृपया ध्यान रखें कि सेतु को केवल स्वरचित, मौलिक, व अप्रकाशित रचना ही भेजें। और इस आशय घोषणा रचना भेजने वाली ईमेल में अवश्य लिखें। रचना भेजने से पहले कृपया एक बार प्रूफ़रीड करके सामान्य व्याकरण त्रुटियाँ हटा दें। रचनाओं में विराम चिह्न तथा अंकों के अंतरराष्ट्रीय रूप का प्रयोग वाँछित है। इस सम्बंध में सहायता के लिये कृपया सही लिखें आलेख ध्यान से पढ़ें। रचना भेजने के नियमों का सारांश निम्न है:
सेतु को भेजी गई रचना यूनिकोड में टंकित, स्वरचित, मौलिक, व अप्रकाशित होनी चाहिये। पहली बार रचना भेजते समय उसके साथ लेखक का संक्षिप्त परिचय तथा स्पष्ट चित्र भी भेजें। रचना भेजने से पहले लेखकों से निवेदन (विस्तृत नियम) पढकर कृपया उनसे सहमति भी दें।
सेतु की ओर से अपने सभी पाठकों का आभार व्यक्त करते हुए मैं सेतु में प्रकाशित रचनाओं पर आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करता हूँ। क्या अच्छा लगा क्या बुरा, और क्या-क्या पढना चाहेंगे, आदि, के बारे में आप अपने विचार बेझिझक हमें लिखें, चाहे ईमेल से या फिर वैबसाइट पर उपस्थित फ़ॉर्म भरकर।

उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्मकाल चल रहा है, कृपया एलर्जी और लू से खुद भी बचें और अन्य लोगों को भी बचाएँ। छाया में रहें। धूप में आते समय टोपी, पल्लू, गमछा आदि से सर ढँककर रखें। सम्भव हो तो पानी की बोतल साथ रखें। कुछ बूंद पानी आपकी या किसी अन्य व्यक्ति की जान बचा सकता है। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और साथ ही ध्यान रखिये अपने उन भाई-बहनों का जो हमारी-आपकी तरह भाग्यवान नहीं हैं। उनकी यथासम्भव सहायता करें। याद रहे बूंद-बूंद से ही सागर भरता है।

शुभकामनाओं सहित,
अनुराग शर्मा