ऐसे विदा न कहो मित्रों ...

गिरिजेश राव
नमस्कार मित्रों!

जैसा मैंने पिछले मास कहा था, करोना की नयी लहर के दुष्प्रभाव के कारण वर्तमान समय भारत के लिये अति कठिन है। जिस भयानक रोग से अति-विकसित राष्ट्रों की व्यवस्था भी टूट गयी थी, उसका प्रभाव अत्यल्प व्यवस्था और बेखबर नागरिकों के बीच और हो भी क्या सकता था? पिछले दो-ढाई मास में शायद ही कोई दिन ऐसा बीता हो जब भारत से कोई बुरी खबर न आयी हो। अनेक प्रसिद्ध साहित्यकारों के साथ-साथ मेरे बचपन के मित्रों, पूर्व-सहकर्मियों, वर्तमान सहकर्मियों के निकट सम्बंधी, और अपने कुछ आत्मीय-जन इस बीच करोना से हारे हैं। हर बीतता दिन किसी शोकगीत लिखने जैसी अनुभूति छोड़ जाता है।

प्रभु जोशी
सेतु के सम्पादन मंडल के सदस्य कन्हैया त्रिपाठी को मातृशोक हुआ, उनकी माताजी को श्रद्धांजलि। प्रसिद्ध लेखक व चित्रकार प्रभु जोशी के अवसान पर सेतु परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि! माधुरी सर्वोत्तम (रीडर्स डाइजेस्ट का हिंदी संस्करण) के सम्पादक अरविंद कुमार ने चुपचाप संसार त्याग दिया, उन्हें सादर नमन! हिंदी क्षेत्र के साथ मेरा अनुभव बहुत अच्छा नहीं रहा है। ज़रा सी प्रसिद्धि पा लेने वालों को भी मैंने सीधा लाभ न दिखने या मतलब न होने की स्थिति में अक्सर फ़ोन न उठाने, उत्तर न देने, न पहचानने, यहाँ तक कि वाट्सऐप पर भेजे संदेशों, और फ़ेसबुक की टिप्पणियों तक की उपेक्षा करते पाया है। ऐसे में अरविंद जी जैसे सक्षम और सफल सम्पादक द्वारा सदा उत्साह के साथ फ़ोन उठाना, लेखन, साक्षात्कार में भरपूर सहयोग देकर प्रोत्साहित करना अपूर्व था। मेरे फ़ोन पर मेरे कुछ कहने से पहले ही उनका "पंडितजी, कैसे हैं?" का उद्गार मुझे सदा याद रहेगा।

अरविंद कुमार
यक़ीन मानिये ये दो-ढाई मास मेरे जीवन के सबसे कठिन रहे हैं। न कोई फ़ोन उठाने का मन करता था और न ही ईमेल आदि संदेशों का उत्तर देने का। यदि इस बीच कुछ संदेश अनुत्तरित रह गये हों, तो क्षमाप्रार्थी हूँ। इसी बीच मेरे मित्र और मघा पत्रिका के संस्थापक सम्पादक गिरिजेश राव उर्फ़ 'सनातन कालयात्री' के असमय अवसान का हृदय-विदारक समाचार भी मिला। हम दोनों हिंदी ब्लॉगिंग में लगभग एक साथ ही आये थे। गिरिजेश की हिंदी कहानियों का तिलिस्म तो अनूठा था ही, विषय की गहराइयों में जाकर प्रामाणिक और अक्सर लोगों की आँखों से छिपे रह जाने वाले तथ्यों की खोज और प्रस्तुति उनकी विशेषता रही। हम दोनों ने अनेक गूढ़ विषयों पर सैकड़ों चर्चाएँ की हैं। कुछ नया लिखने से पहले अनेक संदेशों, पुस्तकों व सूचना-स्रोतों का आदान-प्रदान किया है और लेखों पर एक दूसरे की राय ली है। शिक्षा व व्यवसाय से अभियंता गिरिजेश हिंदी और अंग्रेज़ी में तो निष्णात थे ही, मेरे देखते-देखते उन्होंने उर्दू, संस्कृत व पाली न केवल सीखीं, उनमें महारत हासिल की और उनके सहारे प्राच्य भारतविद्या के अनेक रहस्य खोले। आश्चर्य नहीं कि अल्पकाल में ही उनका आभामण्डल भी बना, और कुछ लोग उनके स्पष्टवाचन से तुनके भी। आयु में मुझसे छोटे, किंतु ज्ञानवृद्ध गिरिजेश का जाना हिंदी में प्रामाणिकता चाहने वाले हर व्यक्ति के लिये एक आघात है।

अनुराग शर्मा
मेरा आप सबसे यही अनुरोध है कि अपने स्वास्थ्य का, अपने मित्रों और परिजनों का पूरा ध्यान रखिये। नाक ढँकता हुआ शुद्ध मास्क लगाना, हाथ आदि धोते रहना, जब लोगों से दूर हों, तब भरपूर प्राणायाम, पैदल-चालन आदि जैसे सामान्य व्यायाम करते रहना, समय पर सोना-जागना, यथाशीघ्र टीके लगवाना, और उसके बाद भी नये/शोधित मास्क आदि द्वारा बचाव करना जारी रखें। जनसंख्या का असंतुलित दवाब भारत का सबसे बड़ा शत्रु है। क्षेत्रफल की दृष्टि से कैनैडा संसार का दूसरा सबसे बड़ा देश है लेकिन एक दिल्ली नगर की जनसंख्या कैनैडा की जनसंख्या से लगभग आधी है। पूरे नीदरलैंड्स की जनसंख्या दिल्ली नगर की जनसंख्या से कम है। इतने भर से भारत की जनसंख्या का घनत्व, और किसी भी विषाणुजनित रोग के प्रसार के खतरे की तीव्रता का अनुमान लगाया जा सकता है। ऊपर से विकासशील देशों की सामान्य समस्याएँ - ढुलमुल प्रशासन, सार्वभौमिक भ्रष्टाचार, अक्षमऔर सुस्त न्याय-व्यवस्था, परियोजना प्रबंधन का अभाव, स्वार्थी राजनैतिक रस्साकशी, जमाखोरी, नकली दवाओं आदि का निर्माण-वितरण-विक्रय नेटवर्क, और चलता है या कुछ नहीं होता की लापरवाह प्रवृत्ति मिलकर बड़ी चुनौती बने। भारत ने इस अभूतपूर्व स्थिति को भी अति शीघ्रता से काबू में लिया। स्थिति को शीघ्र नियंत्रण में लाने के लिये मिला अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी उल्लेखनीय रहा। फिर भी ऑक्सीजन की कमी, तथा फ़ंगस जैसी नई चुनौतियों के चलते कितने अमूल्य जीवन चले गये, इसे ध्यान में रखते हुए हम सबको स्वयं भी भरपूर सचेत रहना होगा, और अपने आसपास सबको सचेत करते रहना होगा।

इस अंक में ड्यूक विश्वविद्यालय के दो छात्रों की रचनाएँ भी सम्मिलित हैं। दूर देश में हिंदी भाषा की उन्नति के लिये उनकी लगन प्रशंसनीय है। कृपया पढ़कर अपनी प्रतिक्रिया द्वारा उन्हें प्रोत्साहित अवश्य करें।

इस अंक के साथ सेतु ने एक और वर्ष पूर्ण कर लिया है। आपके सहयोग के बिना यह यात्रा असम्भव थी, सभी सहयात्रियों का आभार। इस अंक पर अपनी प्रतिक्रिया से हमें अवश्य अवगत कराइये। यदि आप सेतु में लिखना चाहते हैं तो कृपया 'लेखकों से निवेदन' अवश्य पढ़िये। रचना भेजने से पहले उसे जाँचकर त्रुटिनिवारण कर लीजिये। सामान्य त्रुटियों के निवारण के लिये हमारा आलेख 'कृपया सही लिखें' भी अवश्य पढ़ें। 'लेखकों से निवेदन' पढ़ने का कष्ट किये बिना निरंतर ईमेल भेजने वाले महान लेखक हमारी अग्रिम क्षमायाचना स्वीकार करें। लेखकों के लिये विचारणीय कुछ प्रमुख बिंदु:
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  2. परम्परागत पूर्णविराम (।) ही प्रयोग में लायें।
  3. भारतीय अंकों के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप (1, 2, 3,...) का प्रयोग कीजिये।
  4. लोपचिह्नों (...) का दुरुपयोग न करें।
  5. वर्तनी पर विशेष ध्यान दीजिये।
  6. एक-एक रचना के लिये अलग-अलग ईमेल भेजने के बजाय उन्हें एक ही ईमेल और एक ही फ़ाइल में भेजिये।
30 मई को हिंदी समाचारपत्र उदंत मार्त्तण्ड का जन्मदिन और इस नाते हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। सभी हिंदीप्रेमियों को हिंदी पत्रकारिता दिवस की बधाई!

शुभाकांक्षी,

सेतु, पिट्सबर्ग
31 मई 2021 ✍️

1 comment :

  1. Dharmpal Mahendra JainJune 1, 2021 at 9:00 PM

    अप्रैल और मई 2021 का समय भयावह रहा। कोरोना काल में शायद ही कोई परिवार रहा होगा जिसने अपने किसी करीबी को खोया न हो।

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