सम्पादकीय मार्च 2017

सभी पाठकों को पिट्सबर्ग से अनुराग शर्मा का नमस्कार और भारतीय राष्ट्रीय नववर्ष की बधाइयाँ। आपकी अपनी पत्रिका सेतु का मार्च 2017 अंक प्रस्तुत करते हुए मुझे अतीव प्रसन्नता है कि हमें अपने पाठकों का प्रेम और सहयोग निरंतर मिल रहा है। आपको यह बताते हुए मुझे प्रसन्नता है कि सेतु ने पिछले अंक में एक लाख की हिट संख्या को पार किया है और अपने पाठकों, लेखकों, तथा सम्पादन मण्डल के सहयोग से हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

वरिष्ठ लेखिका विदुषी डॉ मृदुल कीर्ति की पातंजल योगसूत्र पर आधारित उपयोगी पुस्तक का विमोचन हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था। इसके लिये उन्हें हार्दिक बधाई। इस विमोचन से सम्बंधित एक रिपोर्ट इस अंक में है। शौर्य गाथाएँ की लेखिका श्रीमती शशि पाधा से एक वार्ता भी इस अंक का एक विशेष आकर्षण है।

सेतु की द्वैभाषिक अवधारणा के अनुकूल, इस अंक में पद्मजा अयंगर द्वारा ज़फर की शायरी के नायाब नमूने 'न किसी की आँख का नूर हूँ' का अंग्रेज़ी पद्यानुवाद भी है। डॉ स्वाति गाडगिल को आप सेतु के अंग्रेज़ी संस्करण में पहले पढ़ चुके हैं, इस अंक में उनकी हिंदी कविता 'सूनी ग़ज़ल' इस बात का उदाहरण है कि सृजन के लिये भाषा कोई बाधा नहीं, बल्कि एक सेतु ही है।

कस्बाई सिमोन और एक पैग ज़िंदगी पुस्तकों की समीक्षा के अतिरिक्त इस अंक में कहानियाँ, शोधपत्र, व्यंग्य, लघुकथाएँ, और कविताएँ तो हैं ही, सेतु के इसी अंक में आप पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में हिंदी सीखने वाली अहिंदीभाषी छात्रा इंसिया केम्पवाला के पालतू पक्षियों के बारे में एक हृदयस्पर्शी संस्मरण कोवू और बाज़ पढ़ सकते हैं।

अमर सेनानी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा, मेहेरवान की वैज्ञानिकों के पत्रों की झलकियाँ, और डॉ कन्हैया त्रिपाठी की अहिंसा शृंखला जैसे स्थाई स्तम्भों के साथ हम यह अंक अपने पाठकों को समर्पित करते हैं। कृपया पढ़कर अपनी राय से अवगत कराइये।


शुभकामनाओं सहित,
अनुराग शर्मा
सेतु, पिट्सबर्ग