प्रणाम मन्नू जी: अनुराग शर्मा

नमस्कार,

जीवन और मृत्यु के दो छोरों के बीच में ही हम एक दूसरे से मुखातिब हैं। हमारे सारे अनुभव इस जीवन, और इसी शरीर अपने-अपने मस्तिष्क की काल-कोठरी में समाहित हैं। रोज़ नये लोग जन्मते हैं, और पुराने संसार छोड़ते जाते हैं। जो लोग हमारे आसपास रहे हैं, या जिन्होंने हमारा जीवन किसी भी रूप में प्रभावित किया है, उनका जाना दु:खदायी होता है। मेरी पीढ़ी के हिंदी साहित्यानुरागियों के सर्वप्रिय लेखकों में से एक मन्नू भण्डारी आज हमारे बीच नहीं हैं। अवाक हूँ। 

मन्नू जी की रचनाओं में से आपका बंटी और महाभोज चर्चित हुए, अनेक कहानियाँ भी, और “एक कहानी यह भी”। लेकिन जिस ऊँचाई को “यही सच है” ने छुआ वहाँ तक हिंदी की कम ही कृतियाँ पहुँची हैं। इसे बार-बार स्त्री मन से जोड़ा जाता है। लेकिन ज़िंदगी के दोराहे, जीवन की विडम्बना, अस्थिर मन के अस्थिर सम्बंध, स्त्री-पुरुष की सीमाएँ नहीं देखते। इस कहानी के कई आयाम हैं लेकिन इस छोटी सी कहानी में मुख्य पात्र के स्त्री होने मात्र से कहानी में निजता भी बनी रही और कथा का प्रभाव जिस तरह कई गुणा बढ़ गया उसने मुझे कहानियों को लिखने और पढ़ने दोनों के लिये एक नयी दृष्टि दी।

यही सच है में जिसे स्त्री मन का द्वंद्व समझा या कहा गया वास्तव में वह किसी भी मन का द्वंद्व हो सकता है। मानव मन की दुविधा, उथल-पुथल, स्वार्थ-कर्तव्य के बीच की विडम्बनाओं की प्रभावी अभिव्यक्ति जिस प्रकार मन्नू जी की रचनाओं में हुई है वह कभी पुरानी नहीं पड़ने वाली। 

यह दुःखद है कि उनका जीवन शांत होने से बहुत पहले ही उनकी लेखनी शांत हो गयी। भारतीय पृष्ठभूमि में एक सामान्य कामकाजी महिला का जीवन वैसे ही आसान नहीं है लेकिन कई बार जीवन में अपने स्व के लिये समय बचता नहीं है। सृजनात्मक लेखन तो दूर व्यक्तिगत डायरी लिखना भी असम्भव हो जाता है। आश्चर्य नहीं कि मन्नू जी ने मात्र 50 कहानियाँ लिखी हैं। जीवन के अंतिम दशकों में तो उनका लिखना बंद सा रहा।  

दिल्ली में लगभग 13 वर्ष का प्रवास होने के बावजूद भी मुझे मन्नू जी के दर्शन का सौभाग्य नहीं मिला। उनसे मिलने और बात करने की तमन्ना सदा दिल में थी लेकिन प्रतिदिन 5 घंटे तक कम्यूट करने वाले एक निम्न-मध्यवर्गीय नौकरपेशा की कठिन ज़िम्मेदारियों ने तब मुझे साहित्य से दूर ही रखा। बहुत बाद में  एक बार कुछ ऐसा घटा कि मेरी सर्वप्रिय लेखिका मेरे साथ फ़ोन पर थीं। दशकों पहले के कितने ही प्रश्न मन के किसी कोने में दबे हुए थे लेकिन उस समय उनकी आवाज़ सुनकर मैं जड़वत रह गया और सामान्य शिष्टाचार से आगे बात ही न कर सका।

मन्नू जी एक अच्छी लेखिका ही नहीं, एक श्रेष्ठ शिक्षक और एक ज़िम्मेदार माँ भी थीं। उनका अवसान हिंदी साहित्य की एक बड़ी क्षति है। लेकिन उनके जीवन का संघर्ष हिंदी साहित्य की और मानवता की और भी बड़ी क्षति है और शायद इस शाश्वत प्रश्न की याद भी कि अच्छे लोगों के साथ बुरा क्यों होता है।

सेतु परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि! 

सेतु के नवम्बर अंक में हम साहित्य के क्षेत्र में प्रतिवर्ष दिये जाने सेतु सम्मान की घोषणा भी करते हैं। सेतु सम्मान, हिंदी व अंग्रेज़ी साहित्य के क्षेत्र में संसार भर की सर्वश्रेष्ठ विभूतियों में से कुछ को चुनकर उनके प्रति अपना सम्मान प्रकट करते हैं। इस बार के "सेतु सम्मान 2021" के लिये छह साहित्यकारों को चुना गया है जिनके नाम निम्न हैं: 
  • चंद्र मौलि (भारत)
  • दीपक शर्मा (भारत)
  • अरिंदम रॉय (भारत)
  • ग्लोरी शशिकला (भारत)
  • मीताली चक्रवर्ती (सिंगापुर)
  • राजेंद्र कृष्ण (संयुक्त राज्य अमेरिका) 
सेतु सम्मान 2021 की विस्तृत जानकारी निम्न कड़ी पर उपलब्ध है: सेतु साहित्य सम्मान 2021
  
जहाँ एक ओर संसार भर में बढ़ते करोना-टीकाकरण के कारण स्थिति नियंत्रण में आती दिख रही है, वहीं विषाणु के नये स्वरूपों के साथ-साथ कई जगह होते टीका-विरोध भी चिंता क विषय बन रहे हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों से बचिये और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखिये। स्वस्थ, प्रसन्न, और जागरूक रहिये। 

सेतु के इस नवीन अंक में कथा-साहित्य को प्रमुख स्थान दिया गया है। अंक पर आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है।

शुभाकांक्षी,
सेतु, पिट्सबर्ग
30 नवम्बर 2021 ✍️

1 comment :

  1. साहित्य की दुनिया में पहला कदम अपनी गुरू मन्नु भंड़ारी मैम की छत्रछाया में ही रखा , जब मिरांडा हाऊस कॉलेज में उन से शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला । कालजयी रचनाओं की लेखिका , ममतामयी अध्यापिका और सब उपर एक सरल सहज पारदर्शी व्यक्तित्व की स्वामिनी मन्नू मैम को शत शत नमन

    ReplyDelete

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।