पर्यावरण काव्य: फूलचंद यादव

धरोहर
स्वर्गीय फूलचंद यादव
विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) पर कविता

हे मानव! कमर कसो अब,
तुम कुछ ऐसा काम करो।
पर्यावरण प्रदूषित हो रहा, 
इसका त्वरित निदान करो॥ 

बन चुकी है विश्व समस्या,
सब मिल इस पर काम करो।
प्रदूषण कम फैलाओ,
इस पर सतत् लगाम कसो॥

गाँव नगर व पार्क सड़क पर,
वृक्षारोपण का कार्य करो।
इनकी सुरक्षा रख-रखाव पर,
नियमित सतत् प्रयास करो॥

आज विश्व पर्यावरण दिवस पर 
सब मिलकर संकल्प करो।
नित्य-प्रति क्षमता बढ़े धरा की 
जग में व्याप्त विकार हरो॥

वृक्ष वनस्पतियाँ लगा लगा कर,
हरा भरा धरती को बनाएँ।
पुष्प-लता संरोपण कर, 
चहुँ दिशि धरा को महकाएँ॥

इस संकल्प को धारण कर हम,
मिलजुल विश्व पर्यावरण दिवस मनाएँ।
सुख-शांति-सम्पन्न हो मानव, 
धरती को इस योग्य बनाएँ॥ 
***

वृक्ष धरा के आभूषण

वृक्ष धरा के आभूषण हैं,
वसुधा का श्रृंगार करें।
पुष्प, लता व अन्न उगाकर, 
धन-धान्य से परिपूर्ण करें॥

लकड़ी बहुत काम आती है,
अन्न वायु जल जीवन देते।
औषधि विविध भाँति धरती पर,
दुःख कष्ट हर, सुख हैं देतें॥

वृक्ष की तुलना नहीं किसी से
वसुन्धरा के हैं वरदान।
यत्र-तत्र जनश्रुति है प्रसरित,
एक वृक्ष दस पुत्र समान॥

ऋषि मुनि ज्ञानी ध्यानी सबकी,
वृक्ष की छाया में मिटी प्यास।
जन्म से लेकर मृत्यु तक
निहित पंचतत्त्व का ही आस॥
***

श्री फूलचंद यादव का संक्षिप्त परिचय

श्री फूलचंद यादव का जन्म 3 अगस्त, 1949 को बस्ती जिले के अहरा नामक गाँव के एक धार्मिक परिवार में हुआ था। इनके पितामह श्री शिव वरन यादव भक्त के नाम से एवं पिता श्री राम बुझरत यादव पुजारी के नाम से जाने जाते थे। इनकी प्राथमिक शिक्षा घर पर ही रामायण से हुई तथा सीधे चौथी कक्षा में एडमिशन हुआ। गोरखपुर विश्वविद्यालय से इन्होंने उच्चशिक्षा प्राप्त की। शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् मगहर, संत कबीर नगर तथा जनता इंटर कॉलेज, लालगंज, बस्ती में अध्यापन कार्य करने लगें। अध्यापन के साथ-साथ टीचर वेलफेयर यूनियन, धर्म एवं समाज सेवा जैसे कई सामाजिक कार्यों से जुड़े रहें। 27 अगस्त, 2022 में इनका देहावसान हो गया। 
फूलचंद जी हृदय से कवि थे और गद्य मात्र वैचारिक साधन था। अध्ययन-अध्यापन के साथ साथ स्वान्तःसुखाय के लिए निरंतर लेखन-कार्य करते रहें, किंतु रुचि को कभी प्रसिद्धि का साधन नहीं बनाया। इनकी कविताओं में परिवार-प्रेम, देश-प्रेम, प्रकृति-प्रेम, ईश्वरीय-चेतना तथा मानवीयता सहज ही चित्रित है। बिना लाग-लपेट के सहज एवं प्रवाहात्मक शैली में गीत, गज़ल, मुक्त एवं छंदबद्ध कविताओं में जीवन-मूल्यों की स्थापना के प्रति अत्यंत सजग दिखाई देते हैं। 

8 comments :

  1. प्रिय बाबूजी
    आपकी यह रचना आपके कर्तव्य परायण और प्रकृति प्रेम के लिए अद्भुत मिशाल है। आपके प्रयास विश्व को शांति और जीवन निहितार्थ कर्तव्य मुखी होने के लिए रहे है।
    निश्चल व्यवहार मृदुभाषी कठोर नियम पालन के लिए तत्पर रहने और प्रेरित करते रहना हम सभी के सफल जीवन का आधार है।

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  2. 🙏🙏🙏🌳🌲🌹🌷

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  3. I inspired and motivated these lines 🙏🙏🙏📝📝📝📝🙏🙏🙏

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  4. Beautiful and true lines 💗💗💗💗

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